
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा। (Photo- ANI)
Mahua Moitra on TMC Rebel MPs: तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी के बागी सांसदों पर निशाना साधा है। उन्होंने लोकसभा सचिवालय की तरफ से जारी नोटिस का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगने पर सवाल उठाए। महुआ ने कहा कि अगर सांसदों के पास अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त वजह है तो उन्हें तय समय में जवाब देने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
महुआ मोइत्रा ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि TMC ने बीजेपी के साथ जाने वाले अपने 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष के पास याचिकाएं दी हैं। लोकसभा सचिवालय ने पिछले हफ्ते इन सांसदों को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा था। यह समय सीमा अब खत्म हो चुकी है। इसके बाद बागी सांसदों ने जवाब देने के लिए दो से तीन हफ्ते का अतिरिक्त समय मांगा है।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि TMC ने जून में ही लोकसभा अध्यक्ष को इस मामले में पत्र लिखा था। ऐसे में बागी सांसदों को अपना जवाब तैयार करने के लिए करीब दो महीने का समय मिल चुका था। उन्होंने सवाल किया कि जब दो महीने में जवाब नहीं दिया गया तो अब एक हफ्ते में जवाब देने में क्या परेशानी है।
उन्होंने कहा हमने जून में लोकसभा अध्यक्ष को लिखा था। वे दो महीने में जवाब क्यों नहीं दे पाए? एक हफ्ते में जवाब देने में दो-तीन हफ्ते से ज्यादा समय क्यों लग रहा है? अगर मुझसे जवाब मांगा जाए तो मैं इतना समय नहीं लूंगी।
महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अब उनका असली चेहरा सबके सामने आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सांसदों की बेवफाई और विश्वासघात को हर कोई देख सकता है। यह बयान TMC सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय के उस बयान के एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि बागी सांसदों ने लोकसभा सचिवालय से नोटिस का जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का अतिरिक्त समय मांगा है।
बागी सांसदों को पिछले महीने लोकसभा सचिवालय की ओर से नोटिस जारी किए गए थे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से सांसदों की अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की गई थी।
बागी सांसदों के बारे में बताया जा रहा है कि वे अपना जवाब दाखिल करने से पहले कानूनी सलाह ले रहे हैं। अतिरिक्त समय मिलने पर इस मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे खिंच सकती है। यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद पार्टी के भीतर बढ़े मतभेदों से जुड़ा है। असंतुष्ट सांसद पार्टी नेतृत्व और सुप्रीमो ममता बनर्जी के फैसलों को चुनौती दे रहे हैं।
TMC का आरोप है कि उसके 20 लोकसभा सांसद पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद बाद में बीजेपी के साथ चले गए और बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा बन गए। पार्टी ने इसी आधार पर उनके खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।
Updated on:
02 Sept 2026 08:14 pm
Published on:
02 Sept 2026 08:14 pm
