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हिमालय में मंडरा रहा ‘झीलों के फटने’ का खतरा! अरुणाचल की 127 और सिक्किम की 40 ग्लेशियल झीलें रडार पर

हिमालय में ग्लेशियल झीलों के बढ़ते खतरे ने चिंता बढ़ाई है। अरुणाचल की 127 और सिक्किम की 40 झीलें GLOF जोखिम में हैं। नेपाल में 1,287 मौतें और 5,083 लोग लापता हैं।
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Himalayan Climate Change
हिमालय की ग्लेशियल झीलें बन रहीं बड़ा खतरा, 167 झीलों पर नजर, photo credit, ChatGpt

Himalayan Glacial Lakes: हिमालय में ग्लेशियल झीलों के बढ़ते खतरे ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। अरुणाचल प्रदेश में 127 ऊंचाई वाली झीलों का ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) जोखिम आकलन किया गया है, जबकि सिक्किम में 40 हाई-हैजर्ड ग्लेशियल झीलें चिह्नित की गई हैं। इनमें सिक्किम की 16 झीलें सबसे ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में हैं। नेपाल में हालिया विनाशकारी बाढ़ ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। वहां अब तक 1,287 लोगों की मौत हो चुकी है और 5,083 लोग लापता हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक तापमान बढ़ने के साथ हिमालयी ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं। इससे कई जगह नई ग्लेशियल झीलें बन रही हैं और पुरानी झीलों का आकार बढ़ रहा है। इन झीलों के प्राकृतिक बांध टूटने पर कम समय में भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर आ सकता है। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी जीएलओएफ कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा खतरा झीलों के नीचे बसे गांवों, शहरों, सड़कों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को होता है।

अरुणाचल में 127 झीलों पर नजर

अरुणाचल प्रदेश में 127 ऊंचाई वाली झीलों का जीएलओएफ जोखिम आकलन किया गया है। अध्ययन में 2 झीलों को हाई रिस्क, 36 को मीडियम रिस्क और 89 को लो रिस्क श्रेणी में रखा गया है। 38 झीलें मीडियम से हाई रिस्क की श्रेणी में आती हैं। जोखिम वाले प्रमुख क्षेत्र अपर दिबांग वैली, वेस्ट कामेंग और तवांग हैं। अध्ययन में कुछ ग्लेशियल झीलों के आकार में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है।

सिक्किम में 40 हाई-हैजर्ड झीलें

सिक्किम में 40 हाई-हैजर्ड ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है। इनमें 16 कैटेगरी-ए, यानी सबसे ज्यादा जोखिम वाली हैं। इसके अलावा 2 कैटेगरी-बी, 9 कैटेगरी-सी में हैं, जबकि 13 झीलों की कैटेगरी अभी तय होना बाकी है। शाको छो को सबसे संवेदनशील झीलों में शामिल किया गया है।

नौ दिन बाद टनल से जिंदा निकले दो युवक

नेपाल में आपदा के दसवें दिन शुक्रवार को त्रिशूली-3ए हाइड्रोपावर परियोजना की टनल से संजय साह और कबीर महारजन को नौ दिन बाद जिंदा निकाल लिया गया। दोनों करीब 170 मीटर अंदर फंसे थे। बचाव दल को उनकी मौजूदगी का पता चलने के बाद मलबा हटाने का काम तेज किया गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1,287 शव बरामद हो चुके हैं, जबकि 5,083 लोग अब भी लापता हैं। रासुवा और नुवाकोट जिलों में करीब 600 छात्र अब तक अनअकाउंटेड बताए जा रहे हैं।

Updated on:
05 Sept 2026 12:14 am
Published on:
05 Sept 2026 12:14 am