
भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India - ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner of India - CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) आमने-सामने हैं। कांग्रेस का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी के साथ मिलीभगत करते हुए SIR के ज़रिए वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ की जिसका उन्हें फायदा हुआ और विपक्ष को नुकसान! विपक्ष का कहना है कि यह लोकतंत्र पर हमला है और ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए! बीजेपी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है! इसी बीच अब असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने विपक्ष पर निशाना साधा है!
सीएम हिमंत ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए CEC के खिलाफ बयानबाजी के मामले में विपक्ष को घेरा! उन्होंने कहा, "मेरी विनम्र राय में जब मुख्य चुनाव आयुक्त या कोई अन्य चुनाव आयुक्त अल्पमत में हों, तो चुनाव आयोग कोई फैसला नहीं ले सकता। चुनाव आयोग का हर फैसला बहुमत से लिया जाता है क्योंकि यह एक सामूहिक संस्था है। इसलिए देश में यह संदेश देना कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने एकतरफा फैसला लिया है, संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। फैसला लेने से पहले हुई बातें अलग बात हैं, लेकिन एक बार जब चुनाव आयोग कोई फैसला ले लेता है, तो वो आम सहमति या बहुमत की राय पर आधारित होता है। इसीलिए मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाना एक राजनीतिक अभियान है। मुझे नहीं लगता कि मुख्य चुनाव आयुक्त असल में, बाकी दो चुनाव आयुक्तों से सलाह लिए बिना कोई फैसला ले सकते हैं। इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाना सिर्फ विपक्ष और 'दिमागी नक्सलियों' की हताशा को दिखाता है।”
इस पूरे मामले में चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि ये आरोप सही नहीं हैं। चुनाव आयोग के अनुसार ड्राफ्टिंग प्रक्रिया के दौरान लिखित टिप्पणियाँ, तकनीकी सुझाव और आपसी मतभेद एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं। चुनाव आयोग का यह भी कहना है कि SIR से जुड़े फैसलों समेत सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।