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जब राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने फेल कर दिया था कांग्रेस का प्लान, अटल बिहारी वाजपेयी बन गए थे पीएम

शंकर दयाल शर्मा 16 जुलाई 1992 को राष्ट्रपति बने थे।1996 के लोक सभा चुनाव के बाद जब किसी को बहुमंत नहीं मिला तो उन्होंने अपने फैसले से बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने की कांग्रेस की योजना पर पानी फेर दिया था।
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Atal Bihari Vajpayee
अटल बिहारी वाजपेयी को 1996 में पहली बार बीजेपी ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया और वह बन भी गए। भले ही 13 दिन के लिए। (फ़ाइल फोटो)

1996 में मई का महीना था। लोक सभा के चुनाव हो चुके थे। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना कर चुनाव लड़ा था। राम जन्मभूमि आंदोलन के चलते पार्टी का ग्राफ काफी ऊपर था। 10 मई को नतीजे आने वाले थे। कांग्रेस को नतीजों का अनुमान था।

नरसिम्हा राव के घर बन रहा था कांग्रेस का प्लान

नतीजे आने से एक दिन पहले, 9 मई को आगे की रणनीति तय करने के लिए प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के घर पर कांग्रेस संसदीय दल की बैठक चल रही थी। प्रणव मुखर्जी अपनी किताब 'द कोलिशन ईयर्स 1996-2012) में लिखते हैं कि कांग्रेस की मंशा थी कि अगली सरकार बनाने के लिए एक गठबंधन तैयार किया जाए और उसे बाहर से समर्थन दिया जाए।

लोक सभा चुनाव 1996 परिणाम: पहली बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी

क्रम संख्यादल का नाम (Party)कुल प्राप्त मत (Votes)मत प्रतिशत (Votes %)जीती गईं सीटें (Seats)
1भारतीय जनता पार्टी (BJP)6,79,50,85120.29%161
2भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)9,64,55,49328.80%140
3जनता दल (JD)2,70,70,3408.08%46
4भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M)2,04,96,8106.12%32
5तमिल मानिला कांग्रेस (TMC)73,39,9822.19%20
6समाजवादी पार्टी (SP)1,09,89,2413.28%17
7द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK)71,51,3812.14%17
8तेलुगु देशम पार्टी (TDP)99,31,8262.97%16
9शिव सेना (SS)49,89,9941.49%15
10भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI)65,82,2631.97%12
11बहुजन समाज पार्टी (BSP)1,34,53,2354.02%11
12समता पार्टी72,56,0862.17%8
13शिरोमणि अकाली दल (SAD)25,34,9790.76%8
14असम गण परिषद (AGP)25,60,5060.76%5
15रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP)21,05,4690.63%5
16निर्दलीय (Independents)2,10,41,5576.28%9
17ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) (AIIC-T)49,03,0701.46%4
18ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (AIFB)12,79,4920.38%3
19हरियाणा विकास पार्टी (HVP)11,56,3220.35%3
20इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML)7,57,3160.23%2
21झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)12,87,0720.38%1
22कर्नाटक कांग्रेस पार्टी (KCP)5,81,8680.17%1
23केरल कांग्रेस (मनी) (KC-M)3,82,3190.11%1
24ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM)3,40,0700.10%1
25मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस (MPVC)3,37,5390.10%1
26ऑटोनॉमस स्टेट डिमांड कमेटी (ASDC)1,80,1120.05%1
27महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (MGP)1,29,2200.04%1
28सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF)1,24,2180.04%1
29यूनाइटेड गोअन्स डेमोक्रेटिक पार्टी (UGDP)1,09,3460.03%1
मनोनीत एंग्लो-इंडियन2
📊कुल वैध मत / सीटें (Grand Total)33,48,73,286100.00%545

नतीजे आए तो अनुमान के मुताबिक ही निकले। कांग्रेस सत्ता से बाहर हो चुकी थी। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी थी। लेकिन, बहुमत उसके पास भी नहीं था। तय था कि गठबंधन सरकार ही बननी है। कांग्रेस अपनी योजना पर काम कर ही रही थी कि पता चला राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने सबसे बड़ी पार्टी का नेता होने के नाते अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने का न्योता दे दिया है।

बीजेपी के पास 161 और कांग्रेस के पास 140 सांसद थे। 46 सीटें जीत कर जनता दल तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। जनता दल और अन्य पार्टियों से बना संयुक्त मोर्चा या कांग्रेस में से कोई बीजेपी को समर्थन देने वाला तो था नहीं। ऐसे में राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा का वाजपेयी को न्योता देने का फैसला आलोचनाओं और विवादों का शिकार हो गया।

आगे चल कर खुद राष्ट्रपति बने प्रणव मुखर्जी ने निजी तौर पर शंकर दयाल शर्मा के फैसले को 'काफी जोखिम भरा' बताया था। राष्ट्रपति के फैसले पर कानूनविद भी बंट गए थे। एक खेमा सबसे बड़ी पार्टी को मौका दिए जाने को सही बता रहा था, जबकि दूसरे का कहना था कि राष्ट्रपति को सरकार की स्थिरता का पहलू भी ध्यान में रखना चाहिए था।

वेंकटरमन ने राजीव गांधी को खुद दी थी सरकार बनाने का दावा नहीं करने की सलाह

शर्मा से पहले आर वेंकटरमन राष्ट्रपति थे। उन्होंने भी 1989 और 1991 में सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाया था। लेकिन, उनके फैसले की आलोचना नहीं हुई थी, क्योंकि दोनों ही मौकों पर प्रधानमंत्री पद के दो-दो दावेदार नहीं थे। 1989 में वीपी सिंह और 1991 में पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने थे।

1989 के मामले में वेंकटरमन ने अपने संस्मरण में लिखा कि उन्होंने खुद राजीव गांधी को सलाह दी थी कि सरकार बनाने का दावा मत करें, क्योंकि लोक सभा में बहुमत नहीं जुटा पाएंगे।

1996 में स्थिति अलग थी। 15 मई को वाजपेयी पहली बार देश के भाजपाई प्रधानमंत्री बन तो गए, लेकिन लोक सभा में बहुमत नहीं जुटा पाए। 27 मई को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

वाजपेयी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने अपनी नीति पर अमल किया। विश्वनाथ प्रताप सिंह को प्रधानमंत्री के लिए चुना गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। तब एचडी देवगौड़ा के नाम पर सहमति बनी। जून के पहले सप्ताह में कांग्रेस के बाहरी समर्थन से संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी और देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने।

अगले साल राष्ट्रपति के रूप में शंकर दयाल शर्मा का कार्यकाल पूरा हो गया, लेकिन उनका 1996 का वह फैसला हमेशा के लिए विवादित रह गया।

Updated on:
16 Jul 2026 02:34 pm
Published on:
16 Jul 2026 12:49 pm