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टेरर फंडिंग केस: क्या मानसून सत्र में शामिल हो पाएंगे जेल में बंद सांसद इंजीनियर रशीद? कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

Engineer Rashid: एनआईए के आतंकवाद फंडिंग मामले में बारामूला सांसद अब्दुल रशीद शेख (इंजीनियर रशीद) जेल में बंद हैं। उन्होंने मानसून सत्र में शामिल होने के लिए पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया है।
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नई दिल्ली

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Anand Shekhar

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Updated: 16 Jul 2026, 2:41 PM IST

Engineer Rashid, Abdul Rashid Sheikh,

बारामूला सांसद इंजीनियर रशीद (फोटो -वीडियो ग्रैब)

Baramulla MP Engineer Rashid: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के बारामूला लोकसभा क्षेत्र से सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ इंजीनियर रशीद की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने संसद के आगामी मॉनसून सत्र में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। टेरर फंडिंग के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद इस सांसद ने एक जन-प्रतिनिधि के तौर पर सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए कोर्ट से कस्टडी पैरोल या अंतरिम जमानत की मांग की थी। अदालत इस पर जल्द ही अपना आदेश सुना सकती है।

बजट सत्र के दौरान मिली थी राहत

यह पहली बार नहीं है जब इंजीनियर रशीद ने संसद की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले, कोर्ट ने उन्हें बजट सत्र की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए कस्टडी पैरोल दी थी, जिससे उन्हें एक सांसद के तौर पर लोकसभा में शामिल होने की इजाजत मिली थी। इसके अलावा उन्हें उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट सालने के लिए भी पैरोल दी जा चुकी है।

इंजीनियर रशीद जेल में क्यों हैं बंद?

इंजीनियर रशीद को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने 2019 में टेरर फंडिंग मामले में 'गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया था। NIA का आरोप है कि वे कश्मीर घाटी में अलगाववादी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने में शामिल थे। तब से वे दिल्ली की तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।

कौन हैं इंजीनियर रशीद?

इंजीनियर रशीद 'जम्मू-कश्मीर अवामी इत्तेहाद पार्टी' (AIP) के संस्थापक और संरक्षक हैं। उन्होंने जेल में रहते हुए ही बारामूला संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के दिग्गज नेता उमर अब्दुल्ला को भारी अंतर से हराकर सबको चौंका दिया था। इंजीनियर रशीद ने 2 लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी।

लोकसभा के चुनाव प्रचार के दौरान, उनके बेटों ने पूरे संसदीय क्षेत्र में ताबड़तोड़ रैलियां और जनसभाएं कीं और उनके पक्ष में भारी जन-समर्थन जुटाया था। जब नतीजे घोषित हुए थे तो रशीद को 4.72 लाख से ज्यादा वोट मिले थे, जबकि उमर अब्दुल्ला 2.68 लाख वोटों तक ही सीमित रह गए।