
India GDP Growth Rate: भारत की आर्थिक विकास दर और वैश्विक चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का भरोसा बढ़ा है। ग्रीक न्यूज वेबसाइट Directus की एक रिपोर्ट के मुताबिक, OECD, S&P Global, Fitch Ratings, एशियाई विकास बैंक (ADB) और Moody’s Ratings ने भारत की GDP ग्रोथ के अनुमान में बढ़ोतरी की है। रिपोर्ट में इसकी वजह घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती और अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों से मिल रहे समर्थन को बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, OECD ने भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, S&P Global ने इसे 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत और Fitch Ratings ने 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत किया है। ADB ने भी अपना अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है, जबकि Moody’s Ratings ने इसे 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया है।
रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि को महामारी के बाद मजबूत सुधार और लगातार बने हुए विकास के रुझान से जोड़ा गया है। इसके मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी तिमाही में यह 6.9 प्रतिशत थी। रिपोर्ट का कहना है कि भारत की आर्थिक वृद्धि अब किसी एक क्षेत्र या मांग के स्रोत पर निर्भर नहीं है। सेवा क्षेत्र और उद्योग, दोनों की बेहतर स्थिति अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है।
भारत की आर्थिक वृद्धि में सेवा क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 8 प्रतिशत थी। वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और पेशेवर सेवाओं में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में इसे सेवा क्षेत्र का सबसे मजबूत प्रमुख उप-क्षेत्र बताया गया है। वहीं, व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और संबंधित सेवाओं में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सार्वजनिक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रही।
रिपोर्ट के अनुसार, IT और पेशेवर सेवाएं भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ती हैं। वहीं, वित्तीय और व्यावसायिक सेवाएं देश में निवेश तथा कारोबारी गतिविधियों को समर्थन देती हैं। इससे अर्थव्यवस्था को घरेलू और वैश्विक, दोनों स्तरों पर लाभ मिलता है।
भारत की आर्थिक मजबूती में औद्योगिक क्षेत्र का योगदान भी बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में द्वितीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 8.6 प्रतिशत रही, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 6.1 प्रतिशत थी। विनिर्माण, निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी गतिविधियों में वृद्धि से उत्पादन क्षमता बढ़ने, रोजगार के अवसर पैदा होने और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होने में मदद मिल सकती है।रिपोर्ट के अनुसार, सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों में एक साथ हो रही वृद्धि भारत की अर्थव्यवस्था को अधिक विविध आधार दे रही है। इससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करने और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच विकास की गति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।