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हैदराबाद में SIR अभियान पर सियासी घमासान, ओवैसी ने उठाए दस्तावेज नियमों पर सवाल

Asaduddin Owaisi: हैदराबाद में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख ओवैसी ने प्रक्रिया को जटिल और बहिष्करणकारी बताते हुए 12 दस्तावेजों की शर्तों पर सवाल उठाए है।
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Jun 25, 2026
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Special Intensive Revision in Hyderabad: हैदराबाद में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे आम नागरिकों के लिए जटिल और बहिष्करणकारी बताया है। हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा कि मतदाता सूची सत्यापन के लिए चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित 12 दस्तावेजों की शर्तें व्यवहारिक नहीं हैं, जिससे बड़ी संख्या में नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

12 दस्तावेजों की शर्त पर उठे सवाल

ओवैसी ने आरोप लगाया कि आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेजों की लिस्ट में शामिल कई विकल्प या तो तेलंगाना में उपलब्ध ही नहीं हैं या फिर व्यवहार में इनका उपयोग बेहद सीमित है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से आम नागरिकों के पास वैध पहचान साबित करने के विकल्प काफी कम रह जाते हैं, जिससे मतदाता सूची से नाम हटने का खतरा बढ़ सकता है।

किन दस्तावेजों को लेकर जताई आपत्ति?

  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) तेलंगाना में लागू नहीं है।
  • स्थायी निवास प्रमाणपत्र राज्य में जारी नहीं किया जाता।
  • फैमिली रजिस्टर प्रणाली मौजूद नहीं है।
  • आधार कार्ड को अकेले पर्याप्त पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा।

उनका कहना है कि इन सीमाओं के कारण नागरिकों के पास दस्तावेजों के विकल्प बेहद सीमित हो जाते हैं और प्रक्रिया जमीनी स्तर पर कठिन बन जाती है।

पैन कार्ड को भी शामिल किया जाए – ओवैसी की मांग

ओवैसी ने सुझाव दिया कि मतदाता सत्यापन प्रक्रिया में पैन कार्ड को भी वैध पहचान दस्तावेज के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि पैन कार्ड एक भरोसेमंद सरकारी दस्तावेज है, जिसे अन्य पहचान पत्रों जैसे ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड के साथ आसानी से सत्यापित किया जा सकता है।

2002 वोटर लिस्ट पर भी सवाल

ओवैसी ने 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उस समय की सूची हाथ से तैयार की गई थी, जिसमें कई प्रकार की त्रुटियां मौजूद थीं। उनके अनुसार नामों की वर्तनी में गलतियां थीं। डेटा में कई विसंगतियां दर्ज हैं, पारिवारिक संबंध और उम्र संबंधी रिकॉर्ड में असंगतियां पाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी गलतियों का खामियाजा आज के योग्य मतदाताओं को नहीं भुगतना चाहिए।

डेटा शेयर न करने का आरोप

ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया से पहले तैयार किया गया मैपिंग डेटा बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) के साथ साझा नहीं किया। उन्होंने कहा कि यदि यह डेटा सार्वजनिक या साझा किया जाता, तो पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल हो सकती थी।

उर्दू भाषियों की परेशानी का मुद्दा

हैदराबाद में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद, ओवैसी ने आरोप लगाया कि गणना फॉर्म केवल अंग्रेजी और तेलुगु भाषाओं में उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे उर्दू भाषी नागरिकों को फॉर्म भरने में कठिनाई हो रही है, जो प्रशासनिक दृष्टि से एक गंभीर कमी है।

SIR प्रक्रिया की समयसीमा

  • 31 जुलाई: ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होगी।
  • 31 जुलाई से 30 अगस्त: दावा और आपत्ति दर्ज कराने की अवधि।
  • 1 अक्टूबर: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

बैकडोर NRC का खतरा

अंत में असदुद्दीन ओवैसी ने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा प्रक्रिया इसी तरह जारी रही, तो यह अप्रत्यक्ष रूप से बैकडोर NRC जैसा प्रभाव पैदा कर सकती है।उन्होंने कहा कि दस्तावेजी बाधाओं और जटिल प्रक्रियाओं के कारण बड़ी संख्या में योग्य नागरिक मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

Published on:
25 Jun 2026 04:50 pm