
Ambikapur collectorate, अंबिकापुर स्थित कलेक्टोरेट भवन (Photo- Patrika)
अंबिकापुर. अंबिकापुर कलेक्ट्रेट का इतिहास अविभाजित सरगुजा रियासत से जुड़ा हुआ है। वर्तमान कलेक्टोरेट भवन का निर्माण वर्ष 1936 में हुआ था। उस समय यह भवन रघुनाथ कंबाइंड हाईकोर्ट एवं कचहरी के रूप में उपयोग में लाया जाता था। आजादी के बाद यह भवन (Surguja Collectorate Building) जिला प्रशासन का प्रमुख केंद्र बन गया। इतिहासकार गोविंद शर्मा का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की तर्ज पर यह भवन बना हुआ है। 1 जनवरी 1948 को सरगुजा रियासत का भारतीय संघ में विलय हुआ था। इस ऐतिहासिक अवसर पर तत्कालीन महाराज रामानुज शरण सिंहदेव ने यहां के पहले कलेक्टर जेडी केरावाला (Surguja collector) को प्रशासनिक सत्ता सौंपी थी। यह घटना सरगुजा के इतिहास में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
स्टेट जमाने का 1936 में बना यह भवन आज भी जस का तस है। इसकी भव्यता देखने लायक है। निर्माण के 90 वर्ष बाद भी मजबूती कायम है। इस भवन में 300 से अधिक दरवाजे व लगभग 700 खिड़कियां हैं। इस भवन (Collectorate Ambikapur) के ऊपर जाने के लिए पीतल की सीढ़ी है जो बंद रहती है। केवल 26 जनवरी व 15 अगस्त को झंडा फहराने के लिए उसे खोला जाता है।
सत्ता हस्तांतरण की याद में महाराज रामानुज शरण सिंहदेव और कलेक्टर जेडी केरावाला ने कलेक्ट्रेट भवन के मुख्य द्वार के सामने एक बरगद का पौधा (Banyan tree in Collectorate) लगाया था। समय के साथ यह पेड़ विशाल स्वरूप ले चुका है और आज भी कलेक्टोरेट परिसर की ऐतिहासिक पहचान बना हुआ है।
रियासतकाल में इस भवन का उपयोग संयुक्त उच्च न्यायालय के रूप में किया जाता था। उस दौर में रियासत के शासक प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ न्यायिक कार्य भी संभालते थे और कई मामलों में स्वयं न्यायाधीश की भूमिका निभाते थे।
स्वतंत्रता के बाद से सरगुजा जिले के प्रशासन की जिम्मेदारी लगातार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अंिधकारियों के हाथों में रही है। वर्तमान कलेक्ट्रेट भवन (Ambikapur collectorate building) न केवल प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र है, बल्कि सरगुजा के गौरवशाली इतिहास का भी साक्षी है।
इतिहासकार गोविन्द शर्मा बताते हैं कि जब 1 जनवरी 1948 को सरगुजा रियासत का भारतीय संघ में विलय हुआ था तो पहले कलेक्टर जेडी केरावाला व एसपी नृपत सिंह थे। इससे पूर्व सरगुजा स्टेट था और रामानुज शरण सिंहदेव अदालत चलाते थे। वहीं कलेक्टोरेट के मुख्य द्वार व सामने भवन पर रघुनाथ कंबाइंड हाईकोर्ट का उल्लेख है।
इतिहासकार गोविन्द शर्मा बताते हैं कि अंबिकापुर कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण 1936 में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की तर्ज पर हुआ है। रामानुज शरण सिंहदेव ने इलाहाबाद जाकर देखा था। इसके बाद यहां आकर निर्माण कराया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट दो मंजिला है। पर यह दो मंजिला नहीं है, लेकिन खिडक़ी, दरवाजे हाईकोर्ट के हिसाब से ही बने हुए हैं।
Published on:
25 Jun 2026 04:42 pm
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