
Surguja Furniture Scam, तात्कालीन जिला परियोजना समन्वयक व फर्म संचालक संजय पटेल (Photo- Patrika)
अंबिकापुर। राजीव गांधी शिक्षा मिशन (सर्व शिक्षा अभियान) में वर्ष 2010-11 में मिडिल स्कूलों के लिए हुई करीब 2.70 करोड़ रुपए की फर्नीचर खरीदी में घोटाला (Furniture Scam) हुआ था। इस मामले में एसीबी ने तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक समेत 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फर्नीचर सप्लाई किए बिल प्रस्तुत कर शासकीय राशि का भुगतान मिलने के बाद पैसों का बंटवारा कर लिया था। आरोपियों के इस कृत्य से शासन को 67 लाख 15 हजार 814 रुपए की आर्थिक क्षति हुई। मामले में अंबिकापुर के तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक राजीव गांधी शिक्षा मिशन सत्यप्रकाश पांडेय और मेसर्स दर्शन फेब्रिकेशन व आकृति प्रिंटिंग प्रेस चोपड़ा पारा के संचालक संजय पटेल को 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
इस संबंध में एसीबी ने बताया कि वर्ष 2010-11 में अविभाजित सरगुजा जिले के अंतर्गत सूरजपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज क्षेत्र की पूर्व माध्यमिक शालाओं में फर्नीचर खरीदी (Furniture purchasing) के लिए राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अंबिकापुर को 2.70 करोड़ रुपए का आवंटन मिला था। तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन के बाद पंजीकृत फर्मों को सीएसआईडीसी की निर्धारित दरों पर फर्नीचर खरीदी एवं सप्लाई के आदेश जारी किए गए थे।
मामले में वर्ष 2017 में अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी। इसमें मेसर्स दर्शन फेब्रिकेशन के संचालक संजय पटेल की भूमिका सामने आई। फर्म ने वास्तव में फर्नीचर की सप्लाई नहीं की, लेकिन सप्लाई दिखाते हुए बिल तैयार कर प्रस्तुत कर दिया। इन्हीं बिलों के आधार पर शासकीय राशि का भुगतान (Without supply got Rupees) प्राप्त किया गया।
विवेचना में यह भी सामने आया कि भुगतान की राशि में से संजय पटेल ने अपना कमीशन रखने के बाद शेष राशि तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पांडेय को दी। एसीबी (ACB Surguja) के अनुसार दोनों के बीच मिलीभगत और षडय़ंत्र से बिना सप्लाई के बिलिंग व भुगतान कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया। एसीबी का कहना है कि इसके पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं।
एसीबी के अनुसार जांच में अन्य फर्नीचर सप्लायरों (Furniture Suppliers) द्वारा भी सप्लाई में अनियमितता किए जाने और तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक द्वारा उनसे कमीशन लिए जाने के तथ्य सामने आए हैं। अन्य फर्मों द्वारा की गई वास्तविक सलाई, प्राप्त भुगतान और कथित कमीशन की राशि की जांच अभी जारी है। एसीबी का कहना है कि इस मामले में आगे और कार्रवाई हो सकती है।
जांच में मिले सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी), 13(2) तथा बीएनएस की धारा 120-बी, 420 और 409 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। करीब 15 वर्ष पुराने इस मामले में दोनों को एसीबी द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
Updated on:
19 Aug 2026 07:54 pm
Published on:
19 Aug 2026 07:54 pm
