
बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी। (Photo -ANI)
भारत सरकार ने बांग्लादेश में तैनात अपने हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी को यूनियन कैबिनेट मंत्री के बराबर दर्जा दे दिया है। यह फैसला सिर्फ औपचारिक मौकों के लिए है।
खास बात यह है कि ढाका में त्रिवेदी के तैनात होने के कुछ ही हफ्तों बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है। बांग्लादेश में नई सरकार बनने से पहले दोनों पड़ोसी देशों के रिश्ते तल्ख हो गए थे, अब पुराने तनाव को पीछे छोड़कर भारत-बांग्लादेश आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
दिनेश त्रिवेदी कोई आम राजनयिक नहीं हैं। वे भारत के बड़े राजनेता हैं, उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबा समय बिताया है। पहले वे तृणमूल कांग्रेस में थे, बाद में भाजपा में शामिल हो गए।
उन्होंने मनमोहन सिंह सरकार में रेल मंत्री और स्वास्थ्य राज्य मंत्री के रूप में भी काम किया है। लोकसभा में बैरकपुर से दो बार और राज्यसभा में कई बार सांसद चुने गए।
बांग्लादेशी भाषा यानी बंगाली पर उनकी अच्छी पकड़ है और पश्चिम बंगाल की सीमा से जुड़े मुद्दों को वे अच्छे से समझते हैं। अप्रैल 2026 में उनकी नियुक्ति की घोषणा हुई और जून में वे सड़क मार्ग से ढाका पहुंचे।
दिलचस्प बात यह है कि भारत में पहली बार ऐसा हुआ है, जब बांग्लादेश बनने के बाद किसी गैर-करियर डिप्लोमैट को ढाका भेजा गया है।
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह दर्जा त्रिवेदी को व्यक्तिगत रूप से दिया गया है। टेबल ऑफ प्रेसिडेंस में उन्हें कैबिनेट मंत्री के बराबर जगह मिलेगी, लेकिन सिर्फ समारोहों के लिए।
इससे ढाका में भारतीय मिशन की हैसियत मजबूत होगी और औपचारिक कार्यक्रमों में उन्हें ऊंचा प्रोटोकॉल मिलेगा। कई जानकारों का मानना है कि यह कदम दोनों देशों के बीच घाव भरने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का संकेत है।
ढाका पहुंचते समय त्रिवेदी ने कहा था कि भारत के 140 करोड़ और बांग्लादेश के 20 करोड़ लोग मिलकर 160 करोड़ का ताकतवर ब्लॉक बना सकते हैं।
उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र में मतभेद तो होते हैं, लेकिन उन्हें बातचीत से सुलझाना चाहिए। दोनों देशों को एक-दूसरे के दर्द और सपनों को समझना होगा।
बांग्लादेश में हाल के बदलावों के बाद रिश्ते कुछ तनावपूर्ण रहे। लेकिन अब दोनों तरफ से कोशिशें तेज हैं। त्रिवेदी जैसे अनुभवी नेता की नियुक्ति और उन्हें मिला उच्च दर्जा इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
वे न सिर्फ राजनीतिक समझ रखते हैं, बल्कि प्रशासनिक अनुभव भी समझते हैं। पड़ोसी देश के साथ अच्छे रिश्ते भारत की पूर्वोत्तर नीति के लिए भी जरूरी हैं। व्यापार, पानी बंटवारा, सीमा सुरक्षा और सांस्कृतिक जुड़ाव जैसे मुद्दों पर काम तेज होने की उम्मीद है।
Published on:
25 Jun 2026 04:32 pm
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