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NEET 2024 से 2026 तक कैसे बदला पेपर लीक पैटर्न? परीक्षा सुधार टास्क फोर्स सदस्य बोले- इस बार पेपर सेटर ने तोड़ा भरोसा

Exam Reforms Task Force: परीक्षा सुधारों के लिए बनाई गई टास्क फोर्स के सदस्य और IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी ने कहा कि टास्क फोर्स का मकसद परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, मज़बूत और लीक-प्रूफ़ बनाना है। उन्होंने NEET 2024 और 2026 में पेपर लीक के पैटर्न में बदलावों के बारे में बताया।
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Jul 27, 2026
V Kamakoti of Exam Reforms Task Force:
IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि (Photo- gdciitm.org)

V Kamakoti of Exam Reforms Task Force: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के लिए बनाई गई हाई-पावर टास्क फोर्स के सदस्य और IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी ने कहा कि समिति का मकसद परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, मजबूत, लीक-प्रूफ और टेक्नोलॉजी पर आधारित बनाना है। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में सबसे बड़ी चुनौती प्रश्न पत्र तैयार करने वालों की ईमानदारी सुनिश्चित करना है।

प्रोफेसर कामाकोटी के अनुसार, 2024 की NEET-UG परीक्षा और 3 मई 2026 को हुई परीक्षा से जुड़े पेपर लीक की घटनाएं दो अलग-अलग चरणों में हुई चूक के कारण हुईं। उन्होंने बताया कि 2024 का पेपर लीक प्रश्न पत्र छपने के बाद लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान हुआ था, जबकि 2026 का लीक ट्रांसपोर्टेशन या वितरण के दौरान नहीं, बल्कि प्रश्न पत्र तैयार करने वालों के स्तर पर हुआ था।

लॉजिस्टिक्स में सुधार, फिर भी पेपर सेटर की ईमानदारी सबसे बड़ी चुनौती

टास्क फोर्स के गठन के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रोफेसर कामाकोटी ने कहा कि परीक्षा केंद्रों की निगरानी और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल को काफी मजबूत किया गया है। हालांकि, प्रश्न पत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों की ईमानदारी अब सिस्टम की सबसे संवेदनशील और अहम कड़ी बन गई है।

IIT मद्रास के डायरेक्टर ने बताया कि 2026 की NEET परीक्षा के लिए NTA परिसर से प्रश्न पत्र निकलने, उसकी छपाई या सुरक्षित बक्सों में परीक्षा केंद्रों तक ले जाने के चरणों के दौरान कोई लीक नहीं हुआ। दूसरे शब्दों में, राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों ने लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम को पूरी तरह सुरक्षित बना दिया था। फिर भी, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से पता चलता है कि 2026 का लीक सीधे प्रश्न पत्र तैयार करने वाले व्यक्ति की ओर से हुआ था।

प्रोफेसर कामाकोटी ने कहा कि किसी भी परीक्षा सिस्टम में दो समूह सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। प्रश्न पत्र तैयार करने वाले और परीक्षा केंद्रों पर मौजूद इनविजिलेटर। हालांकि इनविजिलेटर की निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह बनी हुई है कि प्रश्न पत्र तैयार करने वालों के बीच भरोसा और ईमानदारी कैसे सुनिश्चित की जाए?

नीलेकणि टास्क फोर्स चार प्रमुख स्तंभों पर काम करेगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गठित इस मल्टी-डिसिप्लिनरी टास्क फोर्स की अध्यक्षता इन्फ़ोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इस कमिटी में ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ, IB के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका, पूर्व एजुकेशन सेक्रेटरी अनीता करवाल और IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामाकोटी शामिल हैं। टास्क फोर्स के सदस्य प्रो. कामाकोटी ने साफ़ किया कि कमिटी का मुख्य मकसद प्रधानमंत्री के दिए गए निर्देशों को पूरा करना है, जो चार अहम स्तंभों पर आधारित हैं। पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया, मजबूत ढांचा, लीक-प्रूफ सुरक्षा सिस्टम और टेक्नोलॉजी पर आधारित सिस्टम।

जल्द होगी टास्क फोर्स की मीटिंग

प्रो. कामाकोटी ने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा की विश्वसनीयता उसके सिस्टम पर निर्भर करती है। हमारा एकमात्र मकसद बड़े पैमाने पर पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित परीक्षाएं आयोजित करना है। टास्क फोर्स जल्द ही अपनी पहली बैठक करेगी ताकि NTA में सुधार के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार किया जा सके। इसका मकसद राष्ट्रीय परीक्षाओं में लाखों छात्रों और उनके माता-पिता का अटूट भरोसा फिर से कायम करना है।

Updated on:
27 Jul 2026 05:06 pm
Published on:
27 Jul 2026 05:05 pm