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मौसम पूर्वानुमान बढ़ाने के लिए AI का इस्तेमाल, मशीन लर्निंग के जरिए रखी जा रही हालातों पर निगरानी

आइएमडी महानिदेशक ने कहा, हम मौसम पूर्वानुमान के लिए एआइ-आधारित उपकरण के विकास पर काम कर रहे हैं। आइएमडी ने फिलहाल छोटे पैमाने पर एआइ टूल का इस्तेमाल शुरू किया है। दो-तीन साल में इसका विस्तार किया जाएगा।

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मौसम के ताजा हालात पर अब एआइ टूल के जरिए नजर रखी जाएगी। आइएमडी ने मौसम के बेहतर पूर्वानुमान में कृत्रिम मेधा (एआइ) और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। आइएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र के मुताबिक आने वाले समय में पूर्वानुमानों में सुधार के लिए इसका अन्य क्षेत्रों में विस्तार किया जाएगा। एक समाचार एजेंसी से बातचीत में महापात्र ने कहा कि एआइ-आधारित टूल के विकास का नेतृत्व करने के लिए आइएमडी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) की विशेषज्ञ टीम तैयार की गई है। एआइ और मशीन लर्निंग में उनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइआइटी) के साथ भी सहयोग स्थापित किया गया है।

समय पर सुलभ होंगे सटीक पूर्वानुमान

विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम विभाग की इस पहल से पूर्वानुमान के तरीकों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इससे समय पर ज्यादा सटीक पूर्वानुमान उपलब्ध होंगे। पूर्वानुमान में एआइ और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल ऐतिहासिक मौसम डेटा और वास्तविक समय को लेकर अपडेट दे सकता है। इसके तहत चक्रवात, मानसून और मौसम की अन्य चरम घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

रडार का कमाल

महापात्र ने कहा कि आइएमडी ने 39 डॉपलर मौसम रडार का एक नेटवर्क तैनात किया है। यह देश के 85 फीसदी भू-भाग को कवर करता है और हर घंटे प्रमुख शहरों का पूर्वानुमान बताता है। उन्होंने कहा कि 350 मीटर प्रति पिक्सल के रिजॉल्यूशन वाला यह उन्नत रडार नेटवर्क डेटा संवहनी बादलों का पता लगाने में सक्षम है। इससे भारी बारिश और चक्रवात जैसी चरम घटनाओं को लेकर पूर्वानुमान की सटीकता काफी बढ़ जाती है। कृत्रिम मेधा मॉडल डेटा विज्ञान मॉडल है, जो मौसम संबंधित घटना की भौतिकी में नहीं जाता, बल्कि जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पिछले डेटा का इस्तेमाल करता है।

Updated on:
08 Apr 2024 07:50 am
Published on:
08 Apr 2024 07:49 am