भारत और अजरबैजान के बीच तनाव के बाद अब रिश्तों में सुधार की नई शुरुआत हुई है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद बिगड़े संबंधों को कूटनीतिक वार्ता के जरिए फिर मजबूत करने की कोशिश, व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग पर खास जोर दिया गया।
India-Azerbaijan Relations: भारत और अजरबैजान के रिश्तों में आई ठंडक अब धीरे-धीरे पिघलती नजर आ रही है। एक समय था जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरी साफ दिख रही थी, लेकिन अब उसी रिश्ते को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। शुक्रवार को अजरबैजान की राजधानी बाकू में हुई उच्च स्तरीय बातचीत इसी दिशा में एक अहम संकेत मानी जा रही है। अजरबैजान में ‘विदेश कार्यालय परामर्श’ की बैठक होनी थी। जिसके लिए भारत की तरफ से विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने भाग लिया। इस बैठक की खास बात यह थी कि कई सालों बाद इतनी व्यापक और गंभीर बातचीत हुई है। दोनों देशों के बीच फिर से रिश्ते सुधरने की संभावना लग रहा है।
मामला अप्रैल 2025 से जुड़ा है, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था। इसके जवाब में भारत ने 7 से 10 मई के बीच ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। इस दौरान पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकियों के ठिकानों पर कार्रवाई की गई। लेकिन इस सैन्य कार्रवाई के दौरान अजरबैजान का रुख भारत के खिलाफ था। उसने पाकिस्तान के समर्थन में बयान दिया और भारत की कार्रवाई की आलोचना की। इसके बाद भारत में नाराजगी साफ दिखाई दी। सोशल मीडिया पर अजरबैजान और तुर्की के खिलाफ बहिष्कार की मुहिम चलने लगी। भारत ने भी अजरबैजान के SCO पूर्ण सदस्यता का विरोध किया था।
अब स्थिति बातचीत के जरिए रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिश हो रही है। बैठक में भारत ने साफ तौर पर कई अहम क्षेत्रों पर फोकस रखा। जैसे व्यापार, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, फार्मा सेक्टर, पर्यटन और सांस्कृतिक संबंध। साथ ही, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर भी जोर दिया गया। दूसरी ओर, अजरबैजान ने भी व्यावहारिक सहयोग की बात की। उसने खासतौर पर आर्थिक रिश्तों, शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया। बातचीत के दौरान दोनों देशों ने यह भी स्वीकार किया कि उनके बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण नागोर्नो-काराबाख विवाद रहा है, जहां अजरबैजान का मानना है कि भारत ने आर्मेनिया के पक्ष में झुकाव दिखाया था।