
India Belgium Defence Deal: भारत और बेल्जियम ने रक्षा सहयोग को उत्पादन, तकनीक और औद्योगिक साझेदारी तक विस्तार देने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की मौजूदगी में गुरुवार को हैदराबाद हाउस में कई समझौते हुए। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रैंकेन के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। सिंह ने कहा कि जुलाई में हुई भारत-बेल्जियम रणनीतिक वार्ता ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग के लिए संस्थागत ढांचा तैयार किया है।
पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के रिश्तों का प्रमुख स्तंभ है और आतंकवाद के हर रूप को जड़ से खत्म करना साझा प्रतिबद्धता है। उन्होंने जोरावर हल्के टैंक परियोजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश इस पर मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे रिश्ते और मजबूत होंगे। पूरी तरह भारत में निर्मित रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है। काउंटर-ड्रोन प्रणाली, हथियार और एकीकृत हथियार प्रणालियों के उत्पादन की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। एफएन हर्स्टाल और कल्याणी के बीच संयुक्त उत्पादन केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम हो रहा है।
थेल्स बेल्जियम और कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स के सहयोग से भारत में 70 मिमी रॉकेट बनाए जाएंगे। पहला पूरी तरह भारत में निर्मित रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है। एफएन हर्स्टाल और कल्याणी के बीच हथियार व काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। अर्जुन टैंक की सेंसर तकनीक, जोरावर के बुर्ज, समुद्री माइन निरोधक प्रणालियों और नौसैनिक इंजन तकनीक में भी सहयोग होगा। न्यू लाशोसी-टेम्बो क्लासिक इंजीनियरिंग परियोजना से सालाना करीब 10 करोड़ राउंड गोला-बारूद उत्पादन की योजना है।
ओआइपी सेंसर सिस्टम्स और भारत ऑप्टेल अर्जुन टैंक की दृष्टि व सेंसर प्रणालियों पर सहयोग करेंगे। जॉन कॉकरिल डिफेंस और एलएंडटी जोरावर हल्के टैंक के बुर्ज से जुड़ी तकनीक पर काम करेंगे। जोरावर को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन के लिए विकसित किया जा रहा है।
समुद्री माइन निरोधक प्रणालियों, नौसैनिक इंजन तकनीक और माइन काउंटरमेजर पोतों के लिए स्वायत्त प्रणालियों में सहयोग प्रस्तावित है। न्यू लाशोसी और टेम्बो क्लासिक इंजीनियरिंग के साथ भारत में सालाना करीब 10 करोड़ राउंड गोला-बारूद उत्पादन की योजना है। परियोजना की लागत करीब पांच करोड़ यूरो बताई गई है।