
नवीन श्रीवास्तव, नेपाल में भारत के राजदूत (फोटो- IANS)
Nepal Flood: नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने जन-जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। रसुवा, नुवाकोट, धाड़िंग और चितवन में बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। आपदा में मरने वालों का आकंड़ा 1000 के पार पहुंच गया है। अभी भी 3000 हजार से अधिक लोग लापता हैं। साल 2015 में आए भूकंप के बाद यह बीते दस साल में दूसरी बड़ी आपदा है। भारत ने नेपाल को इस बार भी मदद की है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने गुरुवार को बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित नेपाल में राहत कार्यों में मदद के लिए भारत की ओर से दी जा रही मानवीय सहायता, टनल (सुरंग) से बचाव के लिए खास टीमों और 19 सदस्यों वाली फोरेंसिक टीम का जिक्र किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुनर्निर्माण के लिए पड़ोसी देश की मदद की अपील पर भारत सकारात्मक प्रतिक्रिया देगा।
राजदूत श्रीवास्तव ने बताया कि भारत ने नेपाल को राहत सामग्री भेजी। साथ ही, नेपाल के शीर्ष नेताओं व सरकार से तुरंत संपर्क साधा। नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि जिस दिन आपदा आई, उसी दिन हमने नेपाल सरकार से संपर्क किया था। मैंने विदेश मंत्री और नेपाल सेना के प्रमुख से बात की थी और पूछा था कि उन्हें किस तरह की मदद की जरूरत है। मिली जानकारी के आधार पर हम लगातार संपर्क में रहे। हमारी पहली राहत उड़ान 26 अगस्त की रात काठमांडू पहुंची। उसमें टेंट, स्लीपिंग बैग, दवाइयाँ वगैरह जैसे तुरंत काम आने वाले राहत के सामान और उपकरण थे। इसके बाद, नेपाली सेना और नेपाल की तरफ से मिली जरूरतों और अनुमानों के आधार पर हमने चार और उड़ानें भेजीं। आखिरी उड़ान कल आई थी।
श्रीवास्तव ने बताया कि भारत ने भारी मशीनों से लैस खास तकनीकी टीमें भेजी हैं ताकि स्याफ्रुबेसी और चिलिमे जैसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में बाढ़ के पानी से भरी सुरंगों में फँसे लोगों को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत ने नेपाल को 11 सदस्यों की टीम भेजी, जिन्होंने बंद हुए सुरंगों का मुआयना किया। फिर उस जानकारी और फीडबैक के आधार पर 13 सदस्यों की एक टीम लाए। उन्होंने बताया कि चिलिमे सुरंग के पास हमारी टीम तैनात है।
नेपाल में मौजूद भारतीय राजदूत ने कहा कि नेपाल ने DNA एनालिसिस और टेस्टिंग में मदद मांगी थी। इसलिए हम 19 सदस्यों वाली फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम और उनके उपकरण लेकर आए। वे नेपाल की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने DNA सैंपल इकट्ठा करने और उनका एनालिसिस करने का काम शुरू कर दिया है।
राजदूत नवीन ने कहा कि भारत ने साल 2015 में भी नेपाल की मदद की थी। हम अब भी नेपाल की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल का सबसे करीबी पड़ोसी और सहयोगी है, इसलिए मुझे लगता है कि यह स्वाभाविक है कि जब भी वे ऐसी कोई मांग करेंगे, तो हम सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे।
Updated on:
3 Sep 2026, 10:10 PM IST
Published on:
3 Sep 2026, 10:10 PM IST
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