
Nirmala Sitharaman: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत वित्त वर्ष 2026-27 में 7 प्रतिशत या उससे अधिक की आर्थिक विकास दर बनाए रख सकता है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था ने जिस गति को कायम रखा है, उसके आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। अमेरिका दौरे पर शिकागो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखला में आ रही रुकावटों के बावजूद भारत अपनी विकास गति बनाए रखने में सक्षम है। उन्होंने खास तौर पर अमेरिका-ईरान संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से पैदा हुई चुनौतियों का जिक्र किया।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के साथ भारत की अपनी जरूरतों को समझना सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा रहा है। उनके मुताबिक, कई देशों की आर्थिक गणनाएं वैश्विक घटनाक्रमों के कारण प्रभावित हुई हैं, लेकिन भारत ने परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढाला है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार वैश्विक परिस्थितियों पर नजर रखते हुए भारत की जरूरतों के हिसाब से फैसले ले रही है। इसी वजह से बाहरी झटकों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली है।
मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुई बाधा का असर भारत को मिलने वाली कई जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर पड़ा। निर्मला सीतारमण ने बताया कि कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों जैसी जरूरी चीजों की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। हालांकि, भारत ने सप्लाई के वैकल्पिक रास्ते तलाशकर स्थिति को संभाल लिया। उन्होंने कहा कि देश ने सप्लाई को दूसरे रास्तों से पहुंचाने की व्यवस्था की, जिससे संकट के बावजूद जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिली।
वित्त मंत्री ने उर्वरकों की कीमतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद सरकार ने सब्सिडी के जरिए किसानों के लिए उर्वरकों की कीमतों को स्थिर रखा है। उन्होंने कहा कि नवंबर से शुरू होने वाले आगामी सीजन के लिए भी उर्वरकों की जरूरत होगी और सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि जैसे-जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था का विस्तार होगा, वैसे-वैसे पूंजी की जरूरत भी बढ़ेगी। सरकार आगे भी संरचनात्मक सुधारों को जारी रखेगी और देश में ज्यादा पूंजी जुटाने की कोशिश करेगी।
उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर निजी निवेश में सुधार देखने को मिला है। सरकार के पूंजीगत व्यय पर जोर देने से निजी निवेश को गति मिली है। लेकिन भारत की बढ़ती पूंजी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी निवेश को आकर्षित करना भी जरूरी है।
वित्त मंत्री ने बताया कि कनाडा और अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान वह और सरकार के अन्य मंत्री वैश्विक निवेश फंड्स से बातचीत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वैश्विक निवेशकों के साथ संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने अब तक क्या हासिल किया है, इसे निवेशकों के सामने रखा जा रहा है और उनकी अपेक्षाओं को समझने की कोशिश की जा रही है। सरकार का उद्देश्य निवेशकों की चिंताओं और जरूरतों को समझकर नीतिगत स्तर पर स्पष्टता उपलब्ध कराना है।