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अब ओट्स के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं भारत, मध्यप्रदेश के वैज्ञानिकों ने विकसित की स्वदेशी ग्रेन ओट्स किस्म

MP Oats Farming: ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील से ओट्स आयात पर निर्भर भारत अब स्वदेशी ग्रेन ओट्स के मामले में आत्मनिर्भर बन रहा है। पवारखेड़ा के वैज्ञानिकों ने सात साल के शोध के बाद नई प्रजाति विकसित की है, जिसकी खेती मध्यप्रदेश में 2500 एकड़ में शुरू हो चुकी है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों को फायदा होगा।
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Jun 24, 2026
MP Oats Farming
Oats Farming

Indian Grain Oats: भारत अब ग्रेन ओट्स के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा चुका है। अब तक ग्रेन ओट्स के लिए ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों पर निर्भर रहने वाला भारत, स्वदेशी किस्म विकसित होने के बाद इस सुपरफूड की घरेलू खेती की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पवारखेड़ा स्थित गेहूं अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने सात वर्षों के शोध के बाद स्वदेशी ग्रेन ओट्स की नई प्रजाति विकसित की है। इस उपलब्धि के बाद मध्यप्रदेश में इसकी खेती भी शुरू हो चुकी है और इससे आयात पर होने वाला खर्च घटने की उम्मीद है।

विदेशों से किए जाते थे आयात


देश के शहरी क्षेत्रों में उपयोग होने वाले लगभग 90 प्रतिशत ओट्स अब तक विदेशों से आयात किए जाते थे। इस स्थिति को बदलने के लिए पवारखेड़ा अनुसंधान केंद्र ने वर्ष 2017 में ग्रेन ओट्स के बीज विकसित करने के उद्देश्य से शोध कार्य शुरू किया था। लगातार अनुसंधान के बाद वर्ष 2023 में वैज्ञानिकों ने ग्रेन ओट्स की नई प्रजाति जेडडब्ल्यूजीओ-01 विकसित की। इस प्रजाति के बीज बाजार में आने के बाद मध्यप्रदेश के किसान अब लगभग 2500 एकड़ क्षेत्र में इसकी खेती कर रहे हैं। गुना और अशोकनगर क्षेत्र के किसानों ने इसकी खेती की शुरुआत की है, जिससे राज्य में ओट्स उत्पादन का दायरा बढ़ने लगा है।

स्वदेशी ग्रेन ओट्स के फायदे


वैज्ञानिकों के अनुसार भारतीय जलवायु ग्रेन ओट्स की खेती के लिए अनुकूल है। इसके साथ ही इसकी उपज और पोषण गुणवत्ता भी बेहतर पाई गई है। यही वजह है कि इसे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए उपयोगी विकल्प माना जा रहा है। स्वदेशी ग्रेन ओट्स का उपयोग पोहा, दाना, आटा और दलिया जैसे कई रूपों में किया जा सकता है। पोषण के लिहाज से यह काफी लाभकारी माना जाता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और अन्य जरूरी पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। साथ ही इसे ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी सहायक माना जाता है।

ग्रेन ओट्स की इस सफलता के बाद प्रदेश सरकार ने पवारखेड़ा अनुसंधान केंद्र को अगले पांच वर्षों के लिए आइडीएसी परियोजना सौंपी है। इसके तहत वैज्ञानिक अब ग्रेन ओट्स की नई और अधिक उन्नत प्रजातियों के विकास पर काम करेंगे। इससे आने वाले समय में भारत में ओट्स उत्पादन और पोषण सुरक्षा दोनों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Published on:
24 Jun 2026 05:05 am