Pakistan terrorism UN role India response: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को आतंकवाद समिति में भूमिका मिलने पर विरोध जताया है।
Pakistan terrorism UN role India response: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद विरोधी समिति (Pakistan terrorism UN) का उपाध्यक्ष और तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल असंवेदनशील है, बल्कि आतंकवाद (Kharge on Pakistan terror) से पीड़ित देशों के लिए अपमानजनक है। कांग्रेस ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वह भारत के रुख को समझे और पाकिस्तान के आतंकी इतिहास को नजरअंदाज न करे। खरगे ने कहा कि भारत आतंकवाद का शिकार है, जबकि पाकिस्तान उसका अपराधी है -दोनों की तुलना (India Pakistan comparison) नहीं की जा सकती।
खरगे ने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाने के लिए वैश्विक मंचों पर जवाबदेह ठहराना जरूरी है। भारत और पाकिस्तान की तुलना करना ही गलत है, क्योंकि भारत ने आतंकवाद को झेला है जबकि पाकिस्तान उसे बढ़ावा देता रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान को उसके आतंकी कृत्यों के लिए दंड नहीं दिया जाएगा, तब तक शांति असंभव है।
खरगे ने याद दिलाया कि 2008 और 2012 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF grey list Pakistan) की ग्रे सूची में डलवाया था। इससे पाकिस्तान की आर्थिक गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ गई थी, जिससे आतंकी फंडिंग पर आंशिक रोक लगी थी। उन्होंने मौजूदा हालात को देखते हुए फिर से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने की मांग की।
खरगे ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं- IMF, ADB और वर्ल्ड बैंक की ओर से पाकिस्तान को दिए जा रहे बेलआउट पैकेज और कर्ज पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह पैसा विकास के बजाय पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों और आतंकी नेटवर्क को ताकत देने में खर्च किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर वैश्विक सुरक्षा को खतरा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भारत की जनता, राजनीतिक नेतृत्व और सुरक्षा एजेंसियां आतंक के खिलाफ एकजुट हैं। पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक रुख अपनाना ही समय की मांग है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि वह दोहरापन न अपनाए और आतंक पर जीरो टॉलरेंस दिखाए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के इस बयान ने विपक्षी खेमे में हलचल मचा दी है। भाजपा प्रवक्ताओं ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह वही कांग्रेस है जो अतीत में पाकिस्तान को 'दंडनीय' कहने से भी बचती थी। वहीं, सुरक्षा विशेषज्ञों ने खरगे के इस बयान को ‘जरूरी कूटनीतिक दबाव’ बताया है। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर बहस छिड़ गई है – कई लोग इसे “भारत की सख्त आवाज़” कह रहे हैं।
क्या भारत सरकार अब FATF और UNSC में औपचारिक विरोध दर्ज कराएगी?
क्या भारत पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय पदों पर नामांकन को चुनौती देगा?
क्या खरगे का यह बयान कांग्रेस के विदेश नीति रुख में बदलाव का संकेत है?
इन सवालों पर अगले 48 घंटों में राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों से बड़ी प्रतिक्रिया आ सकती है।
पाकिस्तान को फिर से ग्रे सूची में डलवाने की मांग कहीं अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नई लहर का संकेत तो नहीं?
IMF और वर्ल्ड बैंक की फंडिंग पर सवाल उठाना क्या वैश्विक संस्थाओं की दोहरी नीति पर भारत की नाराजगी है?
क्या कांग्रेस अब अधिक आक्रामक कूटनीति के समर्थन में है ?