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India Power Demand: पांच साल में बिजली की मांग में 91 गीगावाट का उछाल, 2042 तक देश के सामने होगी बड़ी चुनौती

CEA electricity forecast,: देश की ऊर्जा जरूरतें आने वाले वर्षों में तेजी से बदलने वाली हैं। उद्योगों से लेकर घरों तक बढ़ती बिजली की जरूरत के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मौजूदा बिजली तंत्र इस रफ्तार के साथ कदम मिला पाएगा? आने वाले डेढ़ दशक के आंकड़े ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलावों की ओर इशारा करते हैं।
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Oct 10, 2026
India power demand
India power demand : अगले पांच साल में बिजली की मांग में 91 गीगावाट का उछाल, जानिए क्यों बढ़ेगी चुनौती (फोटो सोर्स: ANI)

Peak Power Demand 2030-31: देश में बिजली की पीक डिमांड अगले पांच साल में करीब 35 फीसदी बढ़कर 351 गीगावाट तक पहुंच सकती है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अनुमानों के अनुसार 2025-26 में 260 गीगावाट रहने वाली चरम मांग 2030-31 तक 91 गीगावाट बढ़ जाएगी। ऐसे में चुनौती उत्पादन बढ़ाने के साथ मांग के समय और स्थान पर बिजली उपलब्ध कराने की भी होगी।

आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, शहरीकरण, उद्योगों की जरूरत, एयर कंडीशनर के बढ़ते इस्तेमाल और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रसार से बिजली की खपत बढ़ रही है। तापमान में बढ़ोतरी और अलनीनो के प्रभाव से भी मांग पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

India Power Demand: डेढ़ दशक में दोगुने से ज्यादा होगी मांग

सीईए के दीर्घकालीन अनुमानों के अनुसार, 2031-32 में पीक डिमांड 366 गीगावाट, 2036-37 में 466 गीगावाट और 2041-42 में करीब 575 गीगावाट तक पहुंच सकती है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन के साथ मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और बेहतर ग्रिड प्रबंधन जरूरी होगा।

सौर ऊर्जा के साथ भंडारण जरूरी

सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन में अधिक होता है, जबकि शाम और रात में भी बिजली की जरूरत बनी रहती है। ऐसे में दिन में उत्पादित बिजली को बाद में इस्तेमाल करने के लिए बैटरी भंडारण और ग्रिड प्रबंधन मजबूत करना होगा। केंद्र सरकार ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण के लिए 1.86 लाख करोड़ रुपए की योजना मंजूर की है। इसके तहत 2032-33 तक 135 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए राज्यों के भीतर ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने और 50 गीगावाट घंटे की बैटरी भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।

जमीन और मंजूरी की अड़चनें

ट्रांसमिशन परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण, रास्ते के अधिकार, मुआवजे, वन एवं पर्यावरण मंजूरी और स्थानीय विरोध के कारण देरी हो रही है। राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए नेटवर्क विस्तार अहम है। केंद्र के मुआवजा दिशानिर्देशों के बावजूद कई जगह विवाद बने हुए हैं। समय पर परियोजनाएं पूरी करना और पर्यावरण व पक्षी संरक्षण से जुड़े मुद्दों का समाधान करना बिजली की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए जरूरी होगा।

संख्यात्मक आंकड़े

विवरणअनुमानित आंकड़ा
2025-26 की पीक डिमांड260 गीगावाट
2030-31 की पीक डिमांड351 गीगावाट
पांच साल में मांग में वृद्धि91 गीगावाट
मांग में अनुमानित वृद्धिकरीब 35%
2031-32 की पीक डिमांड366 गीगावाट
2036-37 की पीक डिमांड466 गीगावाट
2041-42 की पीक डिमांड575 गीगावाट
Updated on:
10 Oct 2026 07:28 am
Published on:
10 Oct 2026 07:22 am