Fact Check: ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध का आज 22वां दिन है और फिलहाल इसके खत्म होने के आसार नज़र नहीं आ रहे हैं। युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स अफवाह फैला रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए भारतीय धरती के इस्तेमाल की अनुमति मांगी है। इस पर सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आ गई है।
ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध (Iran-US Israel War) की वजह से मिडिल ईस्ट (Middle East) में हाहाकार मचा हुआ है। आज इस युद्ध का 22वां दिन है और दोनों पक्षों की तरफ से एक-दूसरे पर किए जा रहे हमलों का सिलसिला भी थमने का नाम नहीं ले रहा। अमेरिकी सेना न सिर्फ इज़रायल से, बल्कि मिडिल ईस्ट में अपने कई सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए कर रही है। इसी वजह से ईरान मिडिल ईस्ट में उन सभी देशों पर हमले कर रहा है जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स अफवाह फैला रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए भारतीय धरती (Indian Territory) के इस्तेमाल की अनुमति मांगी है।
सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने पोस्ट शेयर की है और दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए भारत सरकार (Indian Government) से अमेरिकी सेना की मदद की अनुमति मांगी है, जिससे पश्चिमी भारत से ईरान पर बमबारी की जाएगी। इस यूज़र ने यह भी कहा है कि अमेरिका ने भारत से यह अनुमति LEMOA अनुबंध के तहत मांगी है। अब इस दावे पर भारत सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आ गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय के फैक्ट चेक डिपार्टमेंट (MEA Fact Check) ने इसे फेक न्यूज़ बताते हुए लोगों से सोशल मीडिया पर ऐसे झूठे और निराधार दावों और पोस्ट्स से सावधान रहने के लिए कहा है।
LEMOA यानी Logistics Exchange Memorandum of Agreement भारत और अमेरिका के बीच 29 अगस्त 2016 को हुआ था। दोनों देशों के बीच हुआ यह एक अहम सैन्य लॉजिस्टिक्स अनुबंध है। इस अनुबंध के तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं (जैसे बंदरगाह, हवाई अड्डे और बेस) का इस्तेमाल ईंधन भरने, मरम्मत, स्पेयर पार्ट्स, भोजन, पानी, परिवहन और अन्य सेवाओं के लिए कर सकती हैं। यह सुविधा आपसी और प्रतिपूर्ति आधार पर मिलती है। साधारण शब्दों में कहें तो इस्तेमाल की गई सेवाओं का भुगतान करने के आधार पर यह अनुबंध है। सिर्फ इतना ही नहीं, दोनों देशों के बीच हुए इस अनुबंध के तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास, मानवीय सहायता (जैसे आपदा राहत) और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करता है, लेकिन यह कोई सैन्य गठबंधन या आधार स्थापित करने वाला समझौता नहीं है। इस अनुबंध के बावजूद भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार रहती है। यह भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का एक प्रमुख आधारभूत समझौता है, लेकिन इसके तहत अमेरिका, किसी अन्य देश पर हमले के लिए भारत की धरती का इस्तेमाल नहीं कर सकता।