Gravity Hole Mystery: वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर के रहस्यमयी ‘ग्रेविटी होल’ की गुत्थी सुलझा ली है। नई स्टडी के मुताबिक पिछले 10 करोड़ वर्षों में पृथ्वी के भीतर हुए भूगर्भीय बदलाव और भारतीय टेक्टोनिक प्लेट की गतिविधियों ने इस अनोखे गुरुत्वीय क्षेत्र को जन्म दिया।
Indian Ocean Gravity Hole Mystery: हिंद महासागर के दक्षिणी हिस्से में मौजूद रहस्यमयी ‘ग्रेविटी होल’ को लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ा खुलासा किया है। लंबे समय से वैज्ञानिकों को यह समझ नहीं आ रहा था कि इस क्षेत्र में समुद्र की सतह सामान्य से नीचे क्यों दिखाई देती है। अब नई स्टडी में दावा किया गया है कि इसके पीछे पृथ्वी के भीतर पिछले 10 करोड़ वर्षों से चल रहे भूगर्भीय बदलाव जिम्मेदार हैं।
वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट डेटा, वैश्विक भूगर्भीय आंकड़ों और जटिल कंप्यूटर मॉडल की मदद से इस रहस्य को सुलझाने का दावा किया है। इस क्षेत्र को वैज्ञानिक भाषा में 'इंडियन ओशन जियोइड लो' कहा जाता है, जिसे आम तौर पर ‘द ग्रेविटी होल’ के नाम से जाना जाता है।
जब वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट की मदद से पृथ्वी के आकार और गुरुत्वाकर्षण का अध्ययन किया, तो हिंद महासागर के एक हिस्से में समुद्र की सतह सामान्य से नीचे दिखाई दी। ऐसा लग रहा था मानो कोई अदृश्य ताकत समुद्र को नीचे की ओर खींच रही हो।
इसी असामान्य गुरुत्वीय क्षेत्र को ‘ग्रेविटी होल’ नाम दिया गया।
वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को समझने के लिए पिछले 10 करोड़ वर्षों में पृथ्वी के भीतर हुए बदलावों का अध्ययन किया। इसके लिए उन्होंने अत्याधुनिक कंप्यूटर मॉडल तैयार किए, जिनमें टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों, गुरुत्वाकर्षण में बदलाव और पृथ्वी की आंतरिक संरचना को दोबारा सिमुलेट किया गया।
स्टडी में पता चला कि समुद्र तल के काफी नीचे पृथ्वी के मेंटल में बेहद गर्म और हल्का पदार्थ मौजूद है। यह पदार्थ धीरे-धीरे बहता रहता है और करोड़ों वर्षों में इसने उत्तरी हिंद महासागर के नीचे कम घनत्व वाला क्षेत्र तैयार कर दिया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जहां घनत्व कम होता है वहां गुरुत्वाकर्षण भी अपेक्षाकृत कमजोर हो जाता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में समुद्र की सतह धंसी हुई या गड्ढे जैसी दिखाई देती है।
नई स्टडी के अनुसार, अफ्रीका के नीचे से उठने वाला गर्म मेंटल पदार्थ धीरे-धीरे पूर्व दिशा में हिंद महासागर की ओर बढ़ता गया। इस प्रक्रिया में भारतीय टेक्टोनिक प्लेट की गति ने भी अहम भूमिका निभाई।
अध्ययन में कहा गया है कि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट ने इस गर्म पदार्थ के बहाव को दिशा देने का काम किया। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही प्रक्रिया करोड़ों वर्षों में ‘ग्रेविटी होल’ बनने की बड़ी वजह बनी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह खोज पृथ्वी की आंतरिक संरचना, प्लेट टेक्टोनिक्स और गुरुत्वाकर्षण से जुड़े रहस्यों को समझने में बड़ी सफलता मानी जा रही है।