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चुनाव टालना राज्यों को पड़ा भारी, केंद्र ने रोका हजारों करोड़ का फंड, ठप पड़ सकते हैं गांव-शहरों के विकास कार्य

Panchayat Election Delay: पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में देरी अब राज्यों पर भारी पड़ रही है। केंद्र सरकार ने राजस्थान समेत कई राज्यों की हजारों करोड़ रुपए की ग्रांट रोक दी है या सीमित कर दी है।

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भारत

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Rahul Yadav

May 25, 2026

Local Body Election Grant

Local Body Election Grant (AI Image)

Local Body Election Grant: पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में देरी अब राज्यों पर भारी पड़ने लगी है। संवैधानिक दायित्व के तहत समय पर स्थानीय निकाय चुनाव नहीं कराने के कारण केंद्र सरकार ने कई राज्यों की हजारों करोड़ रुपए की ग्रांट रोक दी है या सीमित कर दी है। यह राशि केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राज्यों को मिलनी थी।

राजस्थान में समय पर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नहीं होने के कारण पिछले मार्च में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में करीब 786 करोड़ रुपए की ग्रांट रोक दी गई। राजस्थान समेत पांच राज्यों में पिछले तीन वर्षों के दौरान पंचायत चुनाव नहीं होने के कारण करीब 6500 करोड़ रुपए की ग्रांट प्रभावित हुई है। अन्य राज्यों को मिलाकर यह आंकड़ा और भी बड़ा बताया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वित्त आयोग की ग्रांट रुकने से गांवों में सड़क, पेयजल और सफाई योजनाओं से लेकर शहरों में सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद फिर चर्चा में मुद्दा

राजस्थान में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को लेकर हाल में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यह मामला फिर चर्चा में है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि जहां निर्वाचित पंचायतें और नगर निकाय नहीं होंगे, वहां 15वें वित्त आयोग की पूरी ग्रांट जारी नहीं की जाएगी।

केंद्र का तर्क है कि स्थानीय निकायों के चुनाव कराना राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। राजस्थान के साथ तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों पर भी चुनाव में टालमटोल के आरोप लगते रहे हैं।

केंद्र की दो टूक: निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं तो पूरा फंड नहीं

सूत्रों के अनुसार, 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद भी केंद्र सरकार ने राज्यों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि समय पर चुनाव नहीं कराने पर ग्रांट रोकी जा सकती है।

पंचायती राज मंत्रालय और शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्यों को भेजी एडवाइजरी में कहा है कि केवल उन्हीं स्थानीय निकायों को पूरी ग्रांट मिलेगी, जहां निर्वाचित प्रतिनिधि मौजूद होंगे।

राजस्थान में ग्रामीण और शहरी दोनों ग्रांट प्रभावित

राज्यसभा में केंद्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार पंचायत चुनाव में देरी के चलते 2025-26 में राजस्थान की करीब 786 करोड़ रुपए की ग्रामीण स्थानीय निकाय ग्रांट प्रभावित हुई।

वहीं शहरी निकायों के मामले में 2024-25 में राजस्थान को 15वें वित्त आयोग के तहत 1349 करोड़ रुपए की सिफारिश की गई थी, लेकिन केंद्र से केवल 630.41 करोड़ रुपए जारी किए गए।

छोटे और मध्यम शहरों के लिए प्रस्तावित बेसिक और टाइड ग्रांट जारी नहीं हुई। केवल जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे मिलियन प्लस शहरों से जुड़ी कुछ ग्रांट ही जारी की गई।

वर्षवार ग्रामीण फंड रोका गया (राशि करोड़ रुपए में)

राज्य2023-242024-252025-26
राजस्थान00785.90
तमिलनाडु001572.25
महाराष्ट्र880.791606.28754.05
कर्नाटक373.50395.550
आंध्र प्रदेश33.5542.0331.63

इन कामों के लिए मिलती है ग्रांट

  • पंचायतों के लिए
  • पेयजल योजनाएं
  • पंचायत भवन
  • नाली और सड़क निर्माण
  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
  • मनरेगा समन्वय
  • शहरी निकायों के लिए
  • सफाई व्यवस्था
  • सीवरेज सिस्टम
  • स्ट्रीट लाइट
  • पार्कों का विकास
  • शहरी टैक्स प्रबंधन
  • शहरी परिवहन

अटक सकते हैं 3.56 लाख करोड़ रुपए

एक अप्रैल से लागू हुए 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में 2026-31 के लिए शहरी स्थानीय निकायों को 3.56 लाख करोड़ रुपए की ग्रांट प्रस्तावित की गई है।

हालांकि इसके लिए नियमित चुनाव, वित्तीय पारदर्शिता और स्थानीय कर सुधार जैसी शर्तें रखी गई हैं। यदि राजनीतिक कारणों से नियमित निकाय चुनाव नहीं कराए गए तो यह बड़ी राशि भी अटक सकती है।

CAG पहले ही जता चुका है चिंता

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने 74वें संविधान संशोधन के अमल पर 18 राज्यों की ऑडिट रिपोर्ट में 2014 से 2021 के बीच शहरी निकायों की स्थिति का आकलन किया था। ऑडिट के दौरान 2625 शहरी निकायों में से 1600 में निर्वाचित परिषद नहीं थी। मध्य प्रदेश में 407 में से 347 निकाय बिना निर्वाचित परिषद के पाए गए थे, जबकि राजस्थान में 196 में से 6 निकायों में निर्वाचित परिषद नहीं थी। हालांकि मध्य प्रदेश में 2022 में नगर निकाय चुनाव होने के बाद स्थिति में सुधार हुआ।

बेंगलुरु और तेलंगाना को भी बड़ा नुकसान

बेंगलुरु नगर निगम चुनाव में करीब पांच साल की देरी के कारण 2304 करोड़ रुपए की ग्रांट अटक गई। वहीं शहरी निकाय चुनाव लंबित रहने से कर्नाटक को हर साल करीब 6000 करोड़ रुपए तक की ग्रांट प्रभावित होने का अनुमान है। तेलंगाना में भी नगर निकाय चुनाव नहीं होने से करीब 3500 करोड़ रुपए की ग्रांट प्रभावित हुई है।