
India Nepal Border Security (AI Image)
India Nepal Border Security: भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने की तैयारी शुरू हो गई है। अब सिर्फ आधार कार्ड दिखाकर नेपाल और भूटान में प्रवेश करना आसान नहीं होगा। सशस्त्र सीमा बल (SSB) दोनों देशों की सीमाओं पर हाईटेक निगरानी सिस्टम लागू करने जा रहा है।
एसएसबी भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा के 10 प्रमुख प्रवेश द्वारों पर भारत बॉर्डर एंट्री मैनेजमेंट सिस्टम (BEMS) शुरू करने की तैयारी में है। इस सिस्टम में फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित झूलापुल और उत्तर प्रदेश के बहराइच के रूपईडीहा बॉर्डर पर फेसियल रिकग्निशन सिस्टम का सफल परीक्षण किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, वाहनों की पहचान और निगरानी के लिए अलग लेन भी बनाई जाएगी।
एसएसबी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से अपराधियों, आतंकियों, तस्करों और चोरी की गाड़ियों की पहचान करना आसान होगा। सिस्टम को देश के सुरक्षा सर्वर से जोड़ा जाएगा, जिससे संदिग्ध लोगों की जानकारी तुरंत मिल सकेगी।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI लंबे समय से नेपाल रूट का इस्तेमाल फंडिंग और नेटवर्क संचालन के लिए करती रही है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह सिस्टम यह भी रिकॉर्ड करेगा कि कौन व्यक्ति किस सीमा मार्ग से कितनी बार नेपाल गया। इससे संदिग्ध गतिविधियों और लगातार सीमा पार आवाजाही करने वाले लोगों को ट्रैक करना आसान होगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए सीमा सुरक्षा को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि चुनाव के दौरान नेपाल रूट के जरिए फंडिंग और संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश हो सकती है।
भारत और नेपाल के बीच करीब 1751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जहां बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में नई तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
Published on:
25 May 2026 02:07 am
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