भारत ने स्वदेशी फ्लोटिंग लिडार बॉय तकनीक का सफल परीक्षण किया, जो समुद्री मौसम पूर्वानुमान और पवन ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यह तकनीक हवा की गति, दिशा और वायुमंडलीय डेटा को सटीक रूप से मापकर चक्रवात और तूफानों की भविष्यवाणी को बेहतर बनाएगी।
तमिलनाडु के मुट्टम तट के पास भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा स्वदेशी फ्लोटिंग लिडार बॉय तकनीक का सफल परीक्षण देश की वैज्ञानिक प्रगति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह तकनीक भविष्य में मौसम पूर्वानुमान और समुद्री ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। अब तक भारत को गहरे समुद्र में हवा की गति और वायुमंडलीय स्थितियों का सटीक डेटा प्राप्त करने के लिए विदेशी तकनीकों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन इस स्वदेशी प्रणाली ने उस निर्भरता को काफी हद तक समाप्त कर दिया है।
इस फ्लोटिंग लिडार बॉय को विशेष रूप से समुद्र के ऊपर हवा के पैटर्न और वायुमंडलीय परिस्थितियों को मापने के लिए विकसित किया गया है। इसे राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) ने तैयार किया है, जो समुद्री अनुसंधान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान है। यह तकनीक लेजर किरणों का उपयोग करते हुए समुद्र की सतह से लगभग 300 मीटर ऊंचाई तक के वातावरण का विश्लेषण करने में सक्षम है। इस प्रणाली का कार्य करने का तरीका भी अत्यंत रोचक और उन्नत है। यह बॉय समुद्र की सतह पर तैरते हुए आसमान की ओर लेजर किरणें उत्सर्जित करता है। ये किरणें जब हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों से टकराकर वापस लौटती हैं, तो सेंसर उनकी गति और दिशा का विश्लेषण करते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से हवा की गति, दिशा और विभिन्न ऊंचाइयों पर होने वाले परिवर्तनों का सटीक डेटा प्राप्त किया जाता है।
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह उन समुद्री क्षेत्रों से भी डेटा एकत्र कर सकती है, जहां पारंपरिक उपकरणों की पहुंच सीमित होती है। इससे चक्रवात, समुद्री तूफान और अन्य चरम मौसम घटनाओं की अधिक सटीक भविष्यवाणी संभव होगी। साथ ही, यह समुद्र में पवन ऊर्जा की संभावनाओं का आकलन करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।