वेस्ट एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बढ़ते तनाव पर भारत की संसद में चर्चा तेज होने की संभावना है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर संसद में सरकार का आधिकारिक रुख रखेंगे, जबकि विपक्ष भी इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में है।
Iran-Israel War: वेस्ट एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की संसद तक पहुंच सकता है। माना जा रहा है कि मौजूदा संसद सत्र में यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहेगा। सरकार इस पूरे मामले पर बेहद सतर्क नजर आ रही है और अपने नेताओं को भी सोच-समझकर बोलने की सलाह दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो केंद्र सरकार नहीं चाहती कि इस संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर कोई जल्दबाजी या तीखी टिप्पणी हो। यही वजह है कि पार्टी के नेताओं और मंत्रियों से कहा गया है कि वे बयान देते समय संयम रखें और आधिकारिक लाइन से हटकर कुछ भी न कहें।
इस बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर संसद में भारत की स्थिति साफ करने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक, वह राज्यसभा में सुबह करीब 11 बजे और लोकसभा में दोपहर 12 बजे इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखेंगे। जयशंकर पहले भी कई बार कह चुके हैं कि दुनिया के सभी देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। उनका मानना है कि मौजूदा हालात में तनाव बढ़ाने के बजाय बातचीत के रास्ते से समाधान तलाशना ज्यादा जरूरी है।
भारत ने इस पूरे संकट के बीच मानवीय पहलू को भी नजरअंदाज नहीं किया है। दरअसल, भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र बेहद अहम है। देश की बड़ी तेल जरूरतें इसी इलाके से पूरी होती हैं। इसके अलावा खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और उनकी सुरक्षा भी सरकार के लिए एक बड़ी चिंता रहती है। ऐसे में भारत किसी एक पक्ष के साथ खड़ा दिखने के बजाय संतुलित रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है।
उधर विपक्ष भी इस मुद्दे को संसद में जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस की पार्लियामेंट्री स्ट्रेटेजी ग्रुप की बैठक 10 जनपथ में हुई, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। माना जा रहा है कि विपक्ष सरकार से इस संकट पर स्पष्ट रुख और भारत की रणनीति को लेकर सवाल पूछ सकता है।