
ISRO: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम 'नाविक' को मजबूत और बहाल करने के लिए कवायद कर रहा है। एनवीएस-03 उपग्रह (सैटेलाइट) के जरिए यह कवायद पूरी हो सकती है। मार्च 2026 में आइआरएनएसएस-1एफ सैटेलाइट की एटॉमिक क्लॉक (परमाणु घड़ी) खराब होने और कुछ अन्य पुराने उपग्रहों में आई तकनीकी या कक्षीय समस्याओं के कारण नाविक प्रणाली की कार्यक्षमता प्रभावित हुई थी। कारगिल युद्ध में अमरीका द्वारा जीपीएस सुविधा देने से मना करने के बाद भारत ने अपनी नेविगेशन प्रणाली विकसित की है। 2,250 करोड़ रुपए - भारत ने इस पूरे सिस्टम को तैयार करने में खर्च किए।
11 सैटेलाइट- वर्ष 2013 से अब तक लॉन्च किए गए।
6 सैटेलाइट - ने समस्याओं के कारण काम करना बंद किया।
3 सैटेलाइट - फिलहाल सेवाएं दे रहे हैं।
4 सैटेलाइट - स्वतंत्र रूप से लोकेशन बताने के लिए जरूरी।
जब नाविक के सभी जरूरी सैटेलाइट काम कर रहे थे, तब इससे कई क्षेत्रों को फायदा मिल रहा था।
10,400- से ज्यादा रेल इंजनों की वास्तविक समय में लोकेशन की जानकारी मिलती थी।
40,000 - मछली पकड़ने वाले जहाजों को समुद्र में रास्ता खोजने और सुरक्षा संबंधी सेवाओं में मदद मिलती थी।
60 - मोबाइल मॉडल दुनिया की प्रमुख कंपनियों के हैं जो नाविक को सपोर्ट करते हैं।