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दिन की धूप को रात की बिजली में बदलेगा सिरेमिक! जानिए कैसे काम करेगी यह नई तकनीक

राजस्थान के भड़ला सोलर पार्क में NTPC को 320 किलोवाट के CSP प्रोजेक्ट की मंजूरी मिली है। जानिए सिरेमिक तकनीक से रात में कैसे बनेगी सौर बिजली।
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भारत

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Anurag Animesh

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Updated: 31 Oct 2026, 1:00 AM IST

Solar Park Rajasthan news

AI Image-(ChatGpt)

Bhadla Solar Park Rajasthan: राजस्थान के फलोदी जिले में स्थित भड़ला सोलर पार्क अब ऐसी तकनीक का परीक्षण करने जा रहा है, जिससे सूरज ढलने के बाद भी सौर ऊर्जा से बिजली बनाई जा सकेगी। राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड (RRECL) ने नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) को भड़ला में 320 किलोवाट क्षमता का पायलट कंसंट्रेटेड सोलर पावर (CSP) प्रोजेक्ट लगाने की मंजूरी दे दी है। इसे देश में अपनी तरह की पहली परियोजना बताया जा रहा है। इसकी खासियत यह है कि दिन में सूरज से मिलने वाली ऊर्जा को गर्मी के रूप में जमा किया जाएगा और रात में उसी ऊर्जा से बिजली तैयार होगी। दुनिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा केंद्रों में शामिल भड़ला सोलर पार्क में शुरू होने वाली इस परियोजना का मकसद ऐसी तकनीक की क्षमता परखना है, जो बिजली उत्पादन के लिए महंगी बैटरियों पर निर्भरता कम कर सके।

बिना बड़ी बैटरियों के रात में कैसे बनेगी बिजली?


आमतौर पर सोलर पैनल सूरज की रोशनी मिलने पर ही बिजली पैदा करते हैं। रात में बिजली की आपूर्ति जारी रखने के लिए ऊर्जा को बैटरियों में जमा करना पड़ता है। हालांकि, भड़ला में प्रस्तावित परियोजना में ऊर्जा को स्टोर करने का तरीका अलग होगा। इस प्रोजेक्ट में दिन के समय सूरज से मिलने वाली ऊर्जा को विशेष रूप से तैयार किए गए सिरेमिक मॉड्यूल में गर्मी के रूप में जमा किया जाएगा। ये मॉड्यूल बहुत अधिक तापमान पर ऊर्जा को सुरक्षित रखने में सक्षम होंगे।

सूरज ढलने के बाद सिरेमिक मॉड्यूल में जमा गर्मी का इस्तेमाल एयर टरबाइन चलाने के लिए किया जाएगा। इस टरबाइन की मदद से बिजली पैदा होगी। इस तरह रात में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस तकनीक का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि ऊर्जा भंडारण के लिए बड़े और महंगे केमिकल बैटरी सिस्टम की जरूरत कम हो जाए।

अमेरिकी कंपनी की तकनीक का होगा परीक्षण


भड़ला में प्रस्तावित इस पायलट प्रोजेक्ट में अमेरिका की एक कंपनी द्वारा विकसित सिरेमिक आधारित थर्मल एनर्जी स्टोरेज तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कंपनी के नाम का जिक्र नहीं किया गया है। NTPC, राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ मिलकर इस तकनीक को स्थापित करने और इसकी क्षमता का परीक्षण करने का काम करेगा। RRECL की मंजूरी मिलने के बाद अब प्रस्तावित स्थान पर शुरुआती व्यवहार्यता अध्ययन, साइट सर्वे और निर्माण से जुड़ी तकनीकी जांच का रास्ता साफ हो गया है।

320 किलोवाट बिजली का कहां होगा इस्तेमाल?


भड़ला में स्थापित होने वाले पायलट प्रोजेक्ट की क्षमता 320 किलोवाट होगी। इस परियोजना से बनने वाली बिजली का इस्तेमाल केवल NTPC प्लांट की आंतरिक और सहायक बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।

फिलहाल इस परियोजना का उद्देश्य बड़े स्तर पर व्यावसायिक बिजली उत्पादन करना नहीं, बल्कि नई तकनीक का परीक्षण करना है। इसके जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि सिरेमिक में जमा गर्मी की मदद से सूरज की रोशनी नहीं होने पर बिजली उत्पादन कितना प्रभावी हो सकता है।

प्रयोग सफल रहा तो दूसरे राज्यों में भी हो सकता है इस्तेमाल


सौर ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रात के समय बिजली उत्पादन जारी रखना है। भड़ला का यह प्रोजेक्ट इसी समस्या का एक संभावित समाधान तलाशने की दिशा में कदम है। अगर पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे सफल रहते हैं, तो भविष्य में इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने और देश के अन्य स्थानों पर इस्तेमाल करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। राजस्थान पहले से ही सौर ऊर्जा उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। ऐसे में भड़ला सोलर पार्क में इस नई तकनीक का परीक्षण राज्य के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए अहम साबित हो सकता है। यह पहल देश में स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में भी उपयोगी हो सकती है। हालांकि, तकनीक की वास्तविक क्षमता और बड़े स्तर पर इसके इस्तेमाल की संभावनाएं पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के बाद ही स्पष्ट होंगी।