30 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

15 साल तक पढ़ाया, फिर भी 10 हजार से कम वेतन, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अब सरकार को दिया बड़ा आदेश

UP Teachers Salary: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में संविदा पर काम कर रहीं शिक्षिकाओं को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सभी शिक्षिकाओं को हर महीने 17 हजार रुपए वेतन देने का आदेश दिया है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

प्रयागराज

•

image

Gajanand Prajapat

•

Updated: 30 Oct 2026, 8:20 PM IST

Allahabad High Court Latest News

इलाहाबाद हाईकोर्ट (फोटो-IANS)

Allahabad High Court: उत्तर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में पढ़ाने वाले संविदा शिक्षकों को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने इन शिक्षकों की हालत को बंधुआ मजदूरी जैसा बताया है। कोर्ट ने सरकार को केजीबीवी शिक्षकों के पद बनाने, संविदा शिक्षकों को 17,000 रुपये प्रतिमाह का वेतन देने जैसे कई निर्देश दिए हैं। जस्टिस पंकज भाटिया ने संविदात्मक पूर्णकालिक और अंशकालिक शिक्षकों द्वारा दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए यह निर्देश जारी किए।

सालों की मेहनत के बाद भी नौकरी अस्थायी

केजीबीवी योजना केंद्र सरकार ने 2004 में शुरू की गई थी। इसका मकसद ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों की गरीब व वंचित बच्चियों को आवासीय स्कूल में शिक्षा देना है। यहां शिक्षक संविदा पर रखे गए, जिनका अनुबंध 11 महीने 29 दिन का होता था। फिर एक दिन का ब्रेक देकर इसे दोबारा बढ़ा दिया जाता था।

इस तरह की व्यवस्था के चलते यहां शिक्षक 15 साल से ज्यादा समय से पढ़ा रहे हैं। लेकिन उनकी नौकरी कभी पक्की नहीं हुई। याचिकाकर्ता शिक्षकों का कहना था कि कई बार बिना नोटिस दिए भी उन्हें हटाया जा सकता था। इसके अलावा साल दर साल काम करते हुए कई शिक्षकों की उम्र इतनी निकल गई कि वे अब दूसरी नौकरी के लिए आवेदन भी नहीं कर सकते।

10 हजार से भी कम मिलता था वेतन

संविदा शिक्षकों को हर महीने 12,790 रुपये मिलते थे। इसमें से 25 प्रतिशत पीएफ के रूप में कट जाता था, यानी हाथ में सिर्फ करीब 9,592 रुपये आते थे। शिक्षकों का कहना था कि वे वही काम करते हैं, जो सरकारी स्कूलों के शिक्षक करते हैं और उन्हें प्रशिक्षण भी उसी तरह मिलता है, फिर भी सुविधाएं बराबर नहीं हैं।

सरकार की दलील

इस पक्ष पर सरकार का कहना था कि यह योजना केंद्र द्वारा प्रायोजित है, जिसका खर्च केंद्र और राज्य मिलकर उठाते हैं। उसके मुताबिक इन शिक्षकों को समायोजित करने के लिए कोई स्वीकृत पद ही नहीं है और उनकी नियुक्ति योजना चलने पर निर्भर है। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि अंतिम सुनवाई में केंद्र सरकार का वकील मौजूद नहीं था।

अब मिलेगा 17,000 रुपये वेतन

इस मामले पर कोर्ट ने सख्त रूप से राज्य सरकार से कहा कि चार महीने के भीतर केजीबीवी में शिक्षकों के पद बनाने होंगे। इसके साथ सभी केजीबीवी शिक्षकों को 29 अक्टूबर 2026 से हर महीने 17,000 रुपये देने होंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि इंटरमीडिएट स्तर तक सेवा शर्तें नियमित शिक्षकों के बराबर तय करनी होंगी। योग्यता और सेवा अवधि देखकर पात्र शिक्षकों को स्थायी करने पर विचार करना होगा। सरकार की दलील को खारिज करते हुए कहा कि केंद्र से पैसा न आने का बहाना नहीं चलेगा। राज्य पहले भुगतान करे और बाद में केंद्र का हिस्सा वसूल सकता है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा कि बिना पद बनाए, बिना नौकरी की सुरक्षा दिए और बिना वेतन बढ़ाए सालों तक संविदा पर काम कराना एक तरह की जबरन मजदूरी है। यह संविधान के अनुच्छेद 23 में प्रतिबंधित है। कोर्ट ने इसे अनुच्छेद 14 (समानता) का उल्लंघन भी माना और कहा कि इसे मानदेय कहना भी मजाक है। क्योंकि यह अर्ध-कुशल मजदूर के लिए तय दर से भी कम है। कोर्ट के मुताबिक गरीब बच्चियों को पढ़ाने का लक्ष्य शिक्षकों के अधिकारों की कीमत पर पूरा नहीं किया जा सकता।