
Inflation and Unemployment in India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बेरोजगारी, महंगाई और निजी निवेश में सुस्ती जैसे मुद्दों को उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने हालिया चुनावी नतीजों का हवाला देकर दावा किया कि जनता सरकार की नीतियों से खुश नहीं है। उनके इस हमले ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है कि आखिर चुनावी प्रदर्शन और आर्थिक मुद्दों के बीच विपक्ष किस तरह सियासी संदेश देना चाहता है।
जयराम रमेश ने पीएम मोदी को सलाह दी कि उन्हें विपक्ष पर तंज कसने से बेहतर अपनी नीतियों पर खुद भी गौर करना चाहिए। गुरुवार, 29 अक्टूबर को एक्स पर लिखते हुए उन्होंने वाराणसी और नागपुर के चुनावी नतीजों को उठाया। रमेश ने दावा किया कि वाराणसी में भाजपा दोनों सीटों पर हार गई, वहीं नागपुर जैसे आरएसएस के गढ़ में कांग्रेस जीत गई। उनके मुताबिक ये नतीजे भाजपा के राजनीतिक असर पर सवाल खड़े करते हैं।
रमेश ने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी आज आम आदमी की सबसे बड़ी दिक्कत बन गई है। करोड़ों परिवार महंगी चीज़ों से परेशान हैं, नौजवानों को काम नहीं मिल रहा, और निजी निवेश की हालत भी अच्छी नहीं है। उन्होंने मोदी से अपील की कि विपक्ष की टांग खींचने के बजाए इन मुद्दों पर ध्यान दें और लोगों की परेशानियां दूर करें।
दरअसल यह सारा विवाद 28 अक्टूबर को मोदी की एक टिप्पणी के बाद बढ़ गया, जब एनडीए ने कर्नाटक विधान परिषद की चारों सीटें जीत लीं। मोदी ने उसके बाद एक्स पर कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर सवाल किया उन्होंने यूपी, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की विधान परिषद सीटों का हवाला देते हुए पूछा कि कांग्रेस को आखिर कितनी सीटें मिलीं। इसे विपक्ष पर तंज के तौर पर देखा गया।
इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने भी पलटकर भाजपा के चुनावी प्रदर्शन में कमजोरियों को गिनाया और अलग-अलग राज्यों के नतीजों का हवाला दिया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने सत्तारूढ़ पार्टी की हालत कमजोर दिखाई है। राय ने यहां तक कह दिया कि 2024 में वाराणसी से मोदी की जीत पर भी सवाल हैं, साथ ही चुनावी अनियमितताओं के आरोप भी जोड़े। हालांकि, उनके ये आरोप अभी केवल आरोप ही हैं।
यूपी विधान परिषद की ग्यारह सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा ने छह सीटें जीतीं और समाजवादी पार्टी ने पांच। इसमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र थे। खास तौर पर वाराणसी की शिक्षक सीट पर सपा उम्मीदवार लाल बिहारी यादव की जीत चर्चित रही।
सारी बयानबाजी से साफ है कि आने वाले चुनावों में बेरोजगारी, महंगाई और निवेश जैसे मसले खूब छाए रहेंगे। कांग्रेस चुनावी नतीजों के हवाले से सरकार को घेर रही है, तो भाजपा अपनी जीत के आंकड़े दिखाकर विपक्ष पर वार कर रही है।
सच कहें तो देश की जनता का मूड कुछ सीटों के नतीजों से तय नहीं होता। जयराम रमेश के तर्क राजनीतिक ही हैं। सरकार की नीतियों पर जनता की असल राय जानने के लिए चुनाव नतीजों और आर्थिक आंकड़ों दोनों का पूरा आकलन जरूरी है।