
BRICS Summit 2026: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की तुलना 1955 के ऐतिहासिक बांदुंग सम्मेलन से की। उन्होंने कहा कि आज का विस्तारित BRICS उस सहयोगी सोच का आधुनिक, ज्यादा ताकतवर और संसाधन संपन्न रूप है, जिसका आधार समानता और आपसी लाभ था। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया साइट 'X' पर नई दिल्ली घोषणा पत्र के एक हिस्से को शेयर करते हुए मौजूदा BRICS बैठक को भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और मिस्र के गमाल अब्देल नासिर तथा इंडोनेशिया के सुकर्णो जैसे एशियाई-अफ्रीकी नेताओं की सोच से जोड़ा।
रमेश ने याद दिलाया कि 1955 में इंडोनेशिया के बांदुंग में एशिया और अफ्रीका के देशों का सम्मेलन हुआ था। इन देशों ने पश्चिमी और सोवियत गुटों के बीच बंटे वैश्विक माहौल से अलग अपनी स्वतंत्र राह बनाने की कोशिश की थी। आगे चलकर इसी सोच ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) की नींव तैयार की। कांग्रेस नेता के मुताबिक, आज का विस्तारित BRICS उसी सहयोग की सोच का ज्यादा आधुनिक और प्रभावशाली रूप है। उनके अनुसार, यह समूह समानता और आपसी फायदे के आधार पर सहयोग की उस पुरानी भावना को आगे बढ़ाता है।
जयराम रमेश ने नई दिल्ली घोषणा के पैराग्राफ 16 का हवाला दिया। इसमें 1955 के एशियाई-अफ्रीकी सम्मेलन को याद करते हुए समानता, स्वतंत्रता, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल न देने और आपसी लाभ जैसे सिद्धांतों का जिक्र किया गया है। घोषणा में कहा गया है कि 'बांदुंग स्पिरिट' ज्यादा न्यायपूर्ण, समावेशी और प्रतिनिधित्व वाली बहुपक्षीय व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक संदर्भ का काम करती है। रमेश ने इसी हिस्से को आधार बनाकर BRICS और बांदुंग सम्मेलन के बीच ऐतिहासिक समानता बताई।
कांग्रेस महासचिव ने बांदुंग सम्मेलन के दौरान नेहरू द्वारा लिखे गए निजी नोट्स का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल 1955 की दोपहर नेहरू ने उस ऐतिहासिक बैठक के दौरान अपने नोट्स, स्केच और विचार लिखे थे। रमेश ने इतिहासकार और विद्वान विनीत ठाकुर के हालिया लेख का भी जिक्र किया, जिसमें नेहरू के इन नोट्स और उस समय की उनकी सोच का अध्ययन किया गया है।
जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट के अंत में 1966 की फिल्म 'मेरा साया' के चर्चित गीत 'तू जहां जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा' का भी हल्के-फुल्के अंदाज में जिक्र किया।इसके जरिए उन्होंने संकेत दिया कि दशकों बाद भी बांदुंग की भावना वैश्विक कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग में किसी न किसी रूप में मौजूद है।
जयराम रमेश की यह तुलना BRICS को केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह के तौर पर देखने के बजाय एक व्यापक वैश्विक व्यवस्था से जोड़ती है। उन्होंने नई दिल्ली घोषणा, नेहरू के विचारों और बांदुंग के सिद्धांतों को एक साथ रखते हुए यह बताने की कोशिश की कि अधिक समान और न्यायपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की मांग कई दशक पुरानी है।