
संसद का मानसून सत्र (Parliament Session) खत्म हो गया है। इसके बाद कांग्रेस (Congress) नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ कांग्रेस के लोकसभा सांसद गौरव गोगोई (Gauran Gogoi) भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने सरकार पर निशाना साधने के साथ ही मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की पांच उपलब्धियों के बारे में चर्चा की।
जयराम रमेश ने मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की जिन पांच उपलब्धियों के बारे में ज़िक्र किया, वो इस प्रकार हैं…
1. विपक्ष की पहली उपलब्धि के बारे में बात करते हुए रमेश ने कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' बिल को सरकार मानसून सत्र में पेश करना चाहती थी, लेकिन विपक्ष के विरोध और सवालों के कारण इसे संसद के शीतकालीन सत्र तक टाल दिया गया। इस विषय में संयुक्त समिति की रिपोर्ट भी पेश नहीं हो सकी।
2. विपक्ष की दूसरी उपलब्धि के बारे में बात करते हुए रमेश ने कहा कि 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान' (VBSA) बिल, जिसका मकसद सभी विश्वविद्यालयों का बड़े पैमाने पर केंद्रीकरण करना है पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। इसके बाद इसकी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र तक टाल दी गई।
3. विपक्ष की तीसरी उपलब्धि के बारे में बात करते हुए रमेश ने कहा कि 'संविधान (130वां संशोधन) बिल', जिसमें मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्रियों को गंभीर आरोप होने या 30 दिन की हिरासत की स्थिति में अपने आप पद से हटाने का प्रस्ताव था। इसकी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा था और हर धारा पर चर्चा चल रही थी, लेकिन बैठक के बीच में ही घोषणा कर दी गई कि रिपोर्ट इस सत्र में पेश नहीं की जाएगी।
4. विपक्ष की चौथी उपलब्धि के बारे में बात करते हुए रमेश ने कहा कि पिछले 10 दिनों से मीडिया में जोर-शोर से चर्चा थी कि FCRA बिल जल्द ही आने वाला है। गृह मंत्री इस बात पर पूरी तरह अडिग थे कि इसे पेश किया जाएगा। फिर अमेरिकी उपराष्ट्रपति का फ़ोन आया और हमने नतीजा देखा। विपक्ष और कई संगठनों की तरफ से दबाव था और इसी वजह से सरकार को इसे JPC के पास भेजना पड़ा।
5. विपक्ष की पांचवीं उपलब्धि के बारे में बात करते हुए रमेश ने कहा कि सरकार संसद में दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए इतनी बेताब थी कि उन्होंने पार्टियों में फूट डलवाई। टीएमसी और शिवसेना को तोड़ा और दूसरों को भी तोड़ने की कोशिश की, जिससे परिसीमन बिल पास करने के लिए ज़रूरी विवादित दो-तिहाई बहुमत हासिल किया जा सके। अब यह साफ हो गया है कि सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है। सरकार चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, उन्हें यह कभी नहीं मिलेगा।