
Jammu Kashmir Assembly Session: श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र सोमवार, 21 सितंबर को शुरू हुआ। सत्र के पहले ही दिन सदन में जोरदार हंगामा और नारेबाजी हुई। भाजपा विधायकों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों, बिजली दरों और दैनिक वेतनभोगियों से जुड़े मुद्दे उठाए। भाजपा विधायक हाथों में पोस्टर लेकर सदन में पहुंचे और सरकार से इन मामलों में हस्तक्षेप की मांग की। इस दौरान सदन में सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई और मामला हाथापाई जैसी स्थिति तक पहुंच गया। हालात बिगड़ने पर मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सत्र की कार्यवाही के दौरान भाजपा विधायकों ने सदन के बीचोबीच बैठकर विरोध जताया। इस दौरान कुछ सदस्य आपस में भिड़ गए। मार्शलों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों के सदस्यों को अलग किया। हंगामे के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर नारे लगाए।
स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने सदन के बीच खड़े होकर नारेबाजी कर रहे भाजपा और कांग्रेस विधायकों को अपनी सीटों पर लौटने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, चेतावनी के बाद भी कुछ समय तक नारेबाजी और हंगामा जारी रहा।
भाजपा विधायकों ने एनएचएम कर्मचारियों, बिजली उपभोक्ताओं और दैनिक वेतनभोगियों से जुड़े मुद्दे उठाए। उनके हाथों में ऐसे पोस्टर थे जिन पर एनएचएम कर्मचारियों के साथ न्याय करने, बिजली दरों में बढ़ोतरी वापस लेने और दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करने की मांग लिखी थी। स्पीकर ने प्रदर्शन से जुड़े मामले को विधानसभा की आधिकारिक कार्यवाही में दर्ज नहीं करने और इसकी रिपोर्टिंग नहीं करने का निर्देश दिया।
जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 12 हजार से ज्यादा कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवा से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन में सुधार, नौकरी की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ शामिल हैं। वे वेतन समानता, भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा, बीमा और सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभों की भी मांग कर रहे हैं। कर्मचारी लंबे समय के लिए एक स्पष्ट सेवा नीति चाहते हैं।
एनएचएम कर्मचारियों ने 9 सितंबर को 72 घंटे की हड़ताल शुरू की थी। इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल की अवधि बढ़ाई। सरकार और कर्मचारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन शुरुआती दौर में कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।
18 सितंबर को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू के साथ बैठक के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल टाल दी। सरकार की ओर से उनकी मांगों पर विचार करने का लिखित आश्वासन दिया गया। 17 सितंबर को कर्मचारियों की मांगों की जांच और समाधान के लिए एक समिति गठित करने का आदेश भी जारी किया गया था। इसके बाद कर्मचारियों ने एक महीने के लिए आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया।
कर्मचारी संगठन के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में 12 हजार से ज्यादा एनएचएम कर्मचारी हैं। इनमें जिला, ब्लॉक और क्षेत्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कई लोग वर्षों से एनएचएम के तहत काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी नौकरी और भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति नहीं है। इसी वजह से नियमितीकरण, वेतन और सामाजिक सुरक्षा की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है।
विधानसभा के पहले दिन एनएचएम कर्मचारियों का मुद्दा उठने के साथ ही सदन में हंगामा हुआ। इसके अलावा बिजली दरों और दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी भाजपा विधायकों ने उठाया। वहीं, राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर भी सदन में नारेबाजी हुई। इससे सत्र के पहले ही दिन विधानसभा में राजनीतिक टकराव का माहौल देखने को मिला।