राष्ट्रीय

झीरम घाटी कांड: नक्सली हमले में हुई थी दिग्गज 27 कांग्रेस नेताओं की मौत, 16 सितंबर को होगा सजा का ऐलान

Jhiram Ghati Case: मई 2013 में हुए नक्सली हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। विधानसभा चुनाव से ऐन पहले हमले में राज्य में प्रमुख विपक्षी कांग्रेस के बड़े नेताओं की एक साथ हत्या ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया था और सुरक्षा पर सवाल खड़े किए थे।
2 min read
Sep 06, 2026
NIA
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (File Photo)

Naxal attack Chhattisgarh Jhiram Ghati Case: देश के बहुचर्चित और 13 साल पुराने झीरम घाटी नक्सली हमले मामले में शनिवार को एनआईए की विशेष अदालत से न्याय मिला है। विशेष अदालत के जज अजय सिंह राजपूत ने इस मामले में 10 आरोपियों को 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों के हत्या के प्रयास का दोषी करार दिया है। सजा पर फैसला 16 सितंबर को सुनाया जाएगा। बस्तर क्षेत्र में 25 मई 2013 को झीरम घाटी से गुजर रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल व नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार, गोपी माधवानी समेत 27 कांग्रेस नेताओं हत्या कर दी गई थी। कई लोग घायल हुए थे। अदालत में अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों की गवाही के बाद 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। मामले में कुल 41 आरोपियों को आरोपी बनाया गया था जिनमें से 11 की गिरफ्तारी हुई थी और मुकदमा चलाया गया था। एक आरोपी की मौत के बाद 10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया।

इन्हें सुनाई सजा

प्रमिला मोडियम उर्फ ज्योति, चैतू लेकाम, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कवासी कोसा, आयता मडकम, मडकम देवा, जोगा मडकमी, बंजामी सना, महादेव नाग।

घटना ने झकझोर दिया था

मई 2013 में हुए नक्सली हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। विधानसभा चुनाव से ऐन पहले हमले में राज्य में प्रमुख विपक्षी कांग्रेस के बड़े नेताओं की एक साथ हत्या ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया था और सुरक्षा पर सवाल खड़े किए थे। इसने कई राजनीतिक कयासों को जन्म दिया था। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया लंबी चली। घटना के बाद जांच अलग-अलग स्तरों पर हुई और अंतत: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने अनुसंधान पूरा कर कोर्ट में चालान पेश किया था।

इसलिए झीरम घाटी में हमला…एक तरफ पहाड़ी, दूसरी तरफ खाई

कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान नक्सलियों ने पूरे रूट के सबसे अटैकिंग और अपने लिए सेफ होने के कारण झीरम घाटी को हमले के लिए चुना। घने जंगलों से घिरी हमले की जगह एक तरफ छोटी पहाडिय़ों तो दूसरी तरफ गहरी खाइयों वाला इलाका है जहां नक्सली मजबूत थे। यहां से दरभा थाना भी 17 किमी दूर था। एक ओर पहाड़ी और दूसरी तरफ खाई के चलते यहां एंबूश लगाना बेहद आसान था और बच निकलने या पुलिस मदद पहुंचना मुश्किल था। दो हफ्ते की तैयारी के बाद नक्सलियों ने इस हमले को अंजाम दिया था।

Published on:
06 Sept 2026 06:01 am