
Justice Bhuyan: SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में करोड़ों नाम कटने के विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने गंभीर टिप्पणी की है। जस्टिस भुइयां ने कहा कि लाखों भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया सरासर मनमानी है और कोई भी दलील इसे उचित नहीं ठहरा सकती। यह संविधान के मूल सिद्धांतों पर प्रहार है और संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन है। उनका बयान सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एकबार फिर हमला बोला है।
कांग्रेस महासचिव व राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि ये रहे बेबाक जस्टिस उज्जल भुइयां। जिन्होंने कल हैदराबाद के नलसार यूनिवर्सिटी में बोलते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की पूरी पोल खोलकर रख दी। उन्होंने आगे लिखा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार में जरा भी शर्म बची है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। G2 के गैरकानूनी आदेशों को अमल में लाने की उनकी क्षमता ने उन्हें अब देश के लिए एक बोझ बना दिया है।
वहीं, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री व कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि राजकोट में सेवानिवृत्त जस्टिस नरीमन के विचार और हैदराबाद में कार्यरत जस्टिस भुइयां के विचार जरूर पढ़ें। 22 मार्च 2026 को इंडियन एक्सप्रेस और अन्य अख़बारों में छपा मेरा कॉलम 'मिलियंस ऑफ़ सिटीज़न नॉन-वोटर्स' (करोड़ों नागरिक, जो मतदाता नहीं) भी पढ़ें। मुझे उम्मीद है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट इस अवसर पर आगे आएगा और संविधान व लोकतंत्र को बचाएगा। यह भी उम्मीद है कि भक्त इस पर चुप्पी साधे रखेंगे।
दरअसल, हैदराबाद स्थित विधि विश्वविद्यालय नालसार में रविवार को एक कार्यक्रम में एसआइआर का नाम लिए बिना जस्टिस भुइयां ने कहा कि संविधान में मतदान का अधिकार रखने वाले व उससे वंचित नागरिकों के दो वर्ग नहीं है। दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की प्रक्रिया मनमानी है। नागरिकोंं को मताधिकार से वंचित करने वाली प्रक्रिया मनमानी और संविधान के अनुच्छेद 14 व 326 का उल्लंघन होगी। कोई भी प्राधिकरण ऐसा नहीं कर सकता, कोई भी अदालत इसे माफ नहीं करेगी और कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है।
जस्टिस भुइयां ने कहा कि मृत मतदाता के मामले को छोड़कर वोटर लिस्ट में एक बार दर्ज नाम बिना सूचना और सुनवाई के नहीं हटाया जा सकता। मतदान का अधिकार छीनना शरीर से आत्मा निकालने के समान होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कई निर्णयों में माना है कि मतदान संवैधानिक अधिकार है और संविधान की मूलभूत संरचना का हिस्सा है। वोट का अधिकार विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष से जुड़ा है और हमारी स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि अरबपति व रिक्शा चालक के वोट का मूल्य बराबर है। एक अमेरिकी जज के हवाले से जस्टिस भुइयां ने कहा कि लोकतंत्र में सर्वोच्च पद नागरिक का होता है। मतदान के अधिकार के बिना एक नागरिक का क्या मूल्य है? उन्होंने नालसार के छात्रों की प्रशंसा करते हुए उन्हें प्रतिभाशाली, साहसी और निडर बताया।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आरएफ नरीमन ने एसआइआर में वोटरों के नाम कटने और चुनाव आयोग में एकतरफा निर्णयाें पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे गलत काम करने वाला चुनाव आयोग बर्दाश्त नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी लंबित याचिका पर जल्द निर्णय करना चाहिए। जस्टिस नरीमन राजकोट में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।