राष्ट्रीय

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जज, अब तक कितनों ने दिया इस्तीफा, देखें नाम

Justice Yashwant Varma Cash Recovery Case: यशवंत वर्मा ने कथित कैश विवाद और महाभियोग प्रक्रिया के बीच राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंप दिया, जानिए ऐसे और कौनसे जज है जिन्हें देना पड़ा इस्तीफा।

2 min read
Apr 11, 2026
जस्टिस यशवंत वर्मा (ANI)

Justice Yashwant Varma Resigns: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने आखिरकार राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनके सरकारी आवास से कथित रूप से भारी मात्रा में नकदी मिलने के विवाद और महाभियोग प्रक्रिया के बीच यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।

मामले के दौरान इन-हाउस जांच

इससे पहले उनका तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट किया गया था, जहां उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को शपथ ली थी। उनके खिलाफ पहले से ही इन-हाउस जांच जारी थी, जिसने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया।

कैश कांड से कैसे बढ़ा विवाद?

पूरा मामला उस समय सामने आया जब दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास में आग लगने की घटना हुई। इस दौरान नौकरों के क्वार्टर के पास बने स्टोर रूम से जले हुए नोट मिलने का दावा किया गया।

जस्टिस ने खारिज किए आरोप

हालांकि, जस्टिस यशवंत वर्मा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उनका कहना था कि घटना के समय वे और उनकी पत्नी दिल्ली में मौजूद नहीं थे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि घटनास्थल की सुरक्षा में कोई चूक हुई है, तो उसके लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

महाभियोग की प्रक्रिया भी हुई शुरू

इस विवाद ने संसद तक हलचल मचा दी। लोकसभा में बड़ी संख्या में सांसदों के समर्थन के साथ उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। इसके बाद जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया। ऐसे में इस्तीफा देना उनके लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।

पहले भी कई जज दे चुके हैं इस्तीफा

यह पहली बार नहीं है जब किसी जज ने आरोपों के चलते पद छोड़ा हो। इससे पहले भी कई न्यायाधीश जांच या महाभियोग के दबाव में इस्तीफा दे चुके हैं।

  1. जस्टिस पी. डी. दिनाकरणमद्रास हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पर अवैध जमीन कब्जाने और आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप लगे थे। सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति को लेकर विवाद बढ़ा और जांच शुरू हुई। महाभियोग की प्रक्रिया से पहले ही उन्होंने 2011 में इस्तीफा दे दिया।
  2. जस्टिस सौमित्र सेनकोलकाता हाई कोर्ट के जज पर 33 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा। राज्यसभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित भी हुआ, लेकिन लोकसभा में सुनवाई से पहले उन्होंने 2011 में इस्तीफा दे दिया। यह भारत में किसी जज के खिलाफ पहला सफल महाभियोग माना जाता है।
  3. जस्टिस वी. रामास्वामीसुप्रीम कोर्ट के इस जज पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगा था। 1991 में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया, लेकिन वह पास नहीं हो सका। बढ़ते दबाव के बीच उन्होंने 1994 में पद छोड़ दिया।
  4. जस्टिस दिलीप बी. भोसलेहैदराबाद हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश पर प्रशासनिक अनियमितताओं और पक्षपात के आरोप लगे। हालांकि औपचारिक जांच नहीं हुई, लेकिन विवादों के बीच उन्होंने 2018 में रिटायरमेंट के दिन ही इस्तीफा दे दिया।

पारदर्शिता के लिए बड़ा कदम

जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा भारतीय न्यायपालिका में जवाबदेही और पारदर्शिता के सवालों को फिर से केंद्र में ले आया है। कैश विवाद और महाभियोग प्रक्रिया के बीच उठाया गया यह कदम आने वाले समय में न्यायिक प्रणाली पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

Published on:
11 Apr 2026 03:25 pm
Also Read
View All