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J&K में नए फ्रंट संगठनों को लेकर ISI की भूमिका पर नजर, कश्मीरी पंडितों को मिल रहे धमकी भरे पत्र

Kashmiri Pandit Threat Letters: जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को मिल रहे नए धमकी भरे पत्रों के बीच सुरक्षा एजेंसियों की नजर कथित फ्रंट संगठनों और उनके जरिए निजी जानकारियां जुटाए जाने की आशंका पर है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसी सूचनाएं सीमा पार सक्रिय हैंडलर्स तक पहुंचाई जा सकती हैं।
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Aug 24, 2026
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J&K में नए फ्रंट संगठनों को लेकर ISI की भूमिका पर नजर। फोटो-IANS

Kashmiri Pandit Threat Letters: जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को मिल रहे नए धमकी भरे पत्रों के बीच पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की भूमिका को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की नजर कुछ कथित फ्रंट संगठनों पर है। एक अधिकारी के अनुसार, ISI जम्मू-कश्मीर में ऐसे स्थानीय संगठनों को खड़ा करने की कोशिश कर रही है, जिनके जरिए स्थानीय लोगों, खासकर कश्मीरी पंडितों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सके।

स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाने का आरोप

एक अधिकारी ने ऐसे संगठनों के कथित काम करने के तरीके की जानकारी देते हुए बताया कि इनके सदस्य लोगों से मिलते हैं और उनके कार्यस्थल, आवासीय पते और फोन नंबर जैसी जानकारियां जुटाते हैं। अधिकारी के अनुसार, यह जानकारी सीमा पार सक्रिय हैंडलर्स तक पहुंचाई जाती है। अधिकारी का कहना है कि इस तरह जुटाई गई जानकारी का इस्तेमाल लक्षित हमलों को अंजाम देने और समाज में डर तथा दहशत फैलाने के लिए किया जा सकता है।

ULC जैसे संगठनों पर भी नजर

इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) जैसे संगठन इसी उद्देश्य के लिए बनाए गए हैं। अधिकारी के मुताबिक, ऐसे संगठन खुद को सामान्य सामाजिक संगठन के तौर पर पेश करते हैं और समाज के लिए काम करने का दावा करते हैं, लेकिन आरोप है कि उनका वास्तविक उद्देश्य लोगों से जुड़ी जानकारी गुप्त रूप से बाहर पहुंचाना है। अधिकारी ने कहा कि ऐसे समूह कथित तौर पर लॉजिस्टिक और अन्य संवेदनशील जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, जिससे घाटी में आतंकी हमलों की योजना बनाने में मदद मिल सके।

लक्षित लोगों की सटीक जानकारी को लेकर चिंता

एक अधिकारी के मुताबिक, किसी लक्षित व्यक्ति के बारे में सटीक जानकारी होने से ISI को जम्मू-कश्मीर में अपने अभियानों को अंजाम देने में मदद मिल सकती है। उन्होंने हाल में घाटी में हुए लक्षित हमलों को इसी तरह की योजना का उदाहरण बताया। अधिकारी के अनुसार, इन घटनाओं में पीड़ितों के स्थान और उनकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी काफी सटीक थी, जिसके कारण हमलों को अंजाम दिया गया।

कश्मीरी पंडितों को मिल रहे धमकी भरे पत्र

हाल में सामने आए एक पत्र में उन कश्मीरी पंडितों को धमकी दिए जाने की बात सामने आई है, जो जम्मू-कश्मीर वापस जाने और वहां अपने बच्चों की परवरिश करने के बारे में विचार कर रहे हैं। ऐसे पत्र और सोशल मीडिया पोस्ट समय-समय पर सामने आते रहे हैं। इनका कथित उद्देश्य कश्मीरी पंडितों को घाटी में लौटने से रोकना बताया गया है।

1990 के बाद विस्थापन का संदर्भ

अधिकारियों के अनुसार, अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिति काफी हद तक शांतिपूर्ण रही है। इसके बाद कई कश्मीरी पंडितों को जम्मू-कश्मीर लौटने और उन जगहों को फिर से हासिल करने के लिए प्रोत्साहन मिला, जिन्हें उन्होंने 19 जनवरी 1990 से शुरू हुए अपने विस्थापन के दौरान छोड़ दिया था।

पहले भी मिलती रही हैं ऐसी धमकियां

अधिकारी के अनुसार, कश्मीरी पंडितों को धमकी देने वाले पत्र पहले भी सामने आते रहे हैं। इन धमकियों में उन्हें घाटी छोड़ने, धर्म परिवर्तन करने या मौत का सामना करने की बात कही जाती थी। हालांकि, अधिकारी के मुताबिक, अब जम्मू-कश्मीर में इस तरह की खुली धमकियां देना पहले की तरह संभव नहीं है। ऐसे में ISI समर्थित तत्व कथित तौर पर सोशल मीडिया पोस्ट और पत्रों के जरिए नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

नए पत्रों में निजी जानकारियां होने से बढ़ी चिंता

एक अधिकारी ने बताया कि हाल में प्रसारित हो रहे पत्रों में पहले की तुलना में अधिक सटीक जानकारी मौजूद है। ताजा पत्र में कश्मीरी पंडितों के पते और फोन नंबर तक शामिल होने की बात कही गई है। सबसे अधिक चिंता इस बात को लेकर जताई गई है कि इन पत्रों में जम्मू-कश्मीर से बाहर रहने वाले कुछ कश्मीरी पंडितों की जानकारी भी शामिल है।

फ्रंट संगठनों के जरिए जानकारी जुटाने की आशंका

अधिकारी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर से बाहर रहने वाले लोगों की जानकारी तक पहुंच बनने के पीछे ISI की ओर से ULC जैसे फ्रंट संगठनों को खड़ा करने की रणनीति हो सकती है। इन संगठनों के सदस्य जिन लोगों और अधिकारियों के संपर्क में आते हैं, उन्हें भी जानकारी साझा करते समय सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अधिकारी ने कहा कि ऐसी जानकारियों का इस्तेमाल लक्षित हमलों और जम्मू-कश्मीर में डर एवं दहशत फैलाने के लिए किया जा सकता है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती

कश्मीरी पंडितों को मिल रहे नए धमकी भरे पत्रों में निजी जानकारियों के इस्तेमाल और कथित फ्रंट संगठनों की गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी की है। अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने और उसे सीमा पार सक्रिय हैंडलर्स तक पहुंचाने की कथित रणनीति पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।

Updated on:
24 Aug 2026 03:55 pm
Published on:
24 Aug 2026 03:55 pm