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अनिर्धारित बॉर्डर का फायदा उठा रहा चीन, कब निकलेगा हल? 25वें दौर की सीमा वार्ता पर बोले शशि थरूर

India China border talks: भारत-चीन सीमा विवाद पर 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बीजिंग पहुंच गए हैं। इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि भारत-चीन सीमा का जल्द और स्पष्ट समाधान देश के हित में है। उन्होंने कहा कि 25 दौर की वार्ता के बावजूद अब तक कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई है।
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कांग्रेस नेता शशि थरूर (सोर्स: ANI)

Ajit Doval China visit: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि (SR) स्तर की वार्ता के 25वें दौर पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बीजिंग पहुंचे हैं, जहां वे इस महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेंगे। शशि थरूर ने कहा कि 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर चीन की बेवजह उकसावे और दबाव बनाने की रणनीति को पूरी तरह खत्म करने के लिए भारत के लिए सीमा का जल्द और मजबूती से निर्धारण करना बहुत जरूरी है।

चीनी उकसावे को रोकने के लिए सीमा का निर्धारण जरूरी - शशि थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि भारत-चीन सीमा का मुद्दा देश के लिए बहुत अहम है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों से चीन सीमा के स्पष्ट रूप से तय न होने का गलत फायदा उठाकर लगातार उकसावे वाली हरकतें कर रहा है और मुश्किलें पैदा कर रहा है। ऐसे में, सीमा का स्थायी और स्पष्ट निर्धारण चीन की भारत को अस्थिर करने की लगातार कोशिशों को पूरी तरह रोक देगा। शशि थरूर ने आगे कहा कि अगर अजीत डोभाल इस यात्रा के दौरान कोई बड़ी कामयाबी हासिल कर लेते हैं, तो यह पूरे देश के लिए स्वागत योग्य और संतोषजनक बात होगी।

25 दौर की वार्ता के बाद भी प्रगति नहीं- शशि थरूर

शशि थरूर ने कहा कि सीमा विवाद को लेकर अब तक बातचीत के 25 दौर हो चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन का रुख हमेशा यही रहा है कि सीमा विवाद का समाधान भविष्य की पीढ़ियों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।

शशि थरूर के अनुसार, चीन किसी समाधान तक पहुंचने के बजाय धीरे-धीरे सीमा पर जमीनी हालात को अपने फायदे के हिसाब से बदलना चाहता है और किसी समझौते पर तभी विचार करेगा जब स्थिति पूरी तरह से उसके पक्ष में हो। उन्होंने यह भी कहा कि अजीत डोभाल का दौरा सिर्फ द्विपक्षीय एजेंडे पर केंद्रित नहीं है, बल्कि ब्रिक्स (BRICS) के संदर्भ से भी जुड़ा है। इसलिए, उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस बातचीत से किसी बड़ी द्विपक्षीय सफलता की उम्मीद नहीं है।