
हैदराबाद। तेलंगाना राष्ट्र समिति की प्रमुख के कविता ने राज्य में गंभीर सूखे की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तेलंगाना के करीब 60 लाख किसानों की मदद करने और संकट की घड़ी में राज्य को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की अपील की।
बंजारा हिल्स स्थित तेलंगाना राष्ट्र समिति के पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कविता ने राज्य सरकार पर सूखे की स्थिति से निपटने में पूरी तरह विफल रहने और किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों की घोषणा की है, जिससे केंद्र से सहायता का रास्ता खुलता है, लेकिन तेलंगाना सरकार ने ऐसा कदम नहीं उठाया।
कविता ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री ने हार मान ली है। मैं प्रधानमंत्री से अनुरोध करती हूं कि कृपया हमारी मदद करें। उन्होंने कहा कि 'सुपर अल नीनो' के कारण पैदा हुई गंभीर सूखे की स्थिति तेलंगाना के 60 लाख किसानों के जीवन को प्रभावित कर रही है।
कविता ने प्रधानमंत्री से दक्षिणी राज्यों, खासकर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र की स्थिति पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में भारी बारिश हो रही है, जबकि कुछ राज्यों में जरूरत से ज्यादा बारिश हुई है। मैं केंद्र सरकार से अनुरोध करती हूं कि दक्षिणी राज्यों पर ध्यान दें। खासकर तेलंगाना में हम गंभीर सूखे का सामना कर रहे हैं। जहां भी अतिरिक्त बिजली उपलब्ध है, कृपया हमें मुफ्त बिजली दें। उन्होंने चेतावनी दी कि संकट की इस घड़ी में किसानों को सहायता नहीं मिली तो तेलंगाना के लोग और किसान केंद्र सरकार को माफ नहीं करेंगे।
कविता ने कहा कि तेलंगाना के गठन के बाद से केंद्र से राज्य को कोई अतिरिक्त सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन का असर लोगों के जीवन पर पड़ रहा है और मौजूदा परिस्थितियों में किसानों को तत्काल राहत की जरूरत है।
उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से बारिश के लिए किए जा रहे 'वरुण यज्ञ' पर भी कटाक्ष किया। कविता ने कहा, "हमारे मुख्यमंत्री ने हार मान ली है। वह खुद वरुण यज्ञ कर रहे हैं। उन्हें अपनी पूजा जारी रखने दें। मैं प्रधानमंत्री से अनुरोध करती हूं कि कृपया हमारी मदद करें। तेलंगाना को अभी मुफ्त बिजली की जरूरत है। केवल 24 घंटे की मुफ्त बिजली किसानों को बचा सकती है। यह जिंदगी और मौत का सवाल है।
कविता ने देशभर में युवाओं के प्रदर्शनों, बार-बार सामने आ रहे परीक्षा पेपर लीक और संस्थागत जवाबदेही को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि केवल किसी एक व्यक्ति का इस्तीफा समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था में बदलाव जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वह युवाओं के विरोध प्रदर्शन की सराहना करती हैं, लेकिन किसी मंत्री के इस्तीफे से पेपर लीक की समस्या खत्म नहीं होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे के बाद भी परीक्षा कराने वाली व्यवस्था और एजेंसी में बदलाव नहीं होता है तो इसका क्या लाभ है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर भी कविता ने कहा कि केवल किसी व्यक्ति के पद छोड़ने से व्यवस्था नहीं बदलेगी। उन्होंने पूरी चुनाव प्रणाली में बदलाव और जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई।
कविता ने कहा कि अगर आप सीईसी का इस्तीफा चाहते हैं और वह इस्तीफा दे भी देते हैं, तो इससे क्या फायदा होगा? पूरी व्यवस्था को बदलना होगा और जवाबदेही तय करनी होगी। उन्होंने कहा कि उनके विचार में पेपर बैलेट चुनाव प्रक्रिया के लिए बेहतर समाधान हो सकता है।