
Kerala Waqf Board: केरल वक्फ बोर्ड से जुड़ा कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केरल हाईकोर्ट द्वारा बोर्ड को बड़े नीतिगत फैसले लेने से रोकने के आदेश के बाद बोर्ड ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मामले का तत्काल उल्लेख किए जाने पर इसे सोमवार या मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। बोर्ड का कहना है कि बिना दूसरे पक्ष को नोटिस दिए पारित अंतरिम आदेश के कारण उसकी कार्यप्रणाली लगभग ठप हो गई है। इससे राज्य में वक्फ प्रशासन को लेकर कानूनी और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है।
केरल वक्फ बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी चिताम्बरेश ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश ने बोर्ड को लगभग निष्क्रिय बना दिया है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि तमिलनाडु वक्फ बोर्ड से जुड़े एक समान मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही अंतरिम राहत दे चुका है। बोर्ड का तर्क है कि बिना सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए इस तरह का आदेश प्रशासनिक कार्यों पर गंभीर असर डालता है। अब शीर्ष अदालत इस बात पर विचार करेगी कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता है या नहीं।
केरल हाईकोर्ट ने यह आदेश उन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें राज्य वक्फ बोर्ड के गठन को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि बोर्ड का गठन यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1995 की धारा 14 के अनुरूप नहीं है। अदालत ने कहा कि वक्फ संशोधन कानून 2025 के तहत दो गैर मुस्लिम सदस्यों और एक शिया सदस्य का शामिल होना अनिवार्य है, जबकि वर्तमान बोर्ड में इन सदस्यों का अभाव है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान बोर्ड अदालत की स्पष्ट अनुमति के बिना कोई बड़ा नीतिगत निर्णय, पूंजीगत खर्च या महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला नहीं लेगा। अदालत ने माना कि बोर्ड का गठन पहली नजर में कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं दिखता। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई यह तय कर सकती है कि अंतरिम रोक जारी रहेगी या बोर्ड को राहत मिलेगी। इस फैसले का प्रभाव केवल केरल ही नहीं बल्कि वक्फ संशोधन कानून 2025 के तहत गठित अन्य राज्य वक्फ बोर्डों पर भी पड़ सकता है।