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30 दिन जेल में रहने पर PM और CM को हटाने वाले बिल पर JPC की रिपोर्ट टली, ड्राफ्ट पर अभी और होगी चर्चा

Constitutional Amendment Bill: प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को गंभीर आरोपों में 30 दिन की न्यायिक हिरासत के आधार पर पद से हटाने से जुड़े विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने रिपोर्ट को मंजूरी देने का फैसला फिलहाल टाल दिया है।
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130th Constitutional Amendment Bill

JPC अध्यक्ष अपराजिता सारंगी (फ़ोटो- X@AprajitaSarangi)

130th Constitutional Amendment Bill: गंभीर आरोपों के तहत 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने से जुड़े बिल की जांच के लिए बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी देने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। समिति की चेयरपर्सन और भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने कहा कि सदस्यों को लगा कि इस विषय पर और चर्चा की जरूरत है, इसलिए रिपोर्ट को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

12 बैठकें, 43 संगठन और दो सीएम के साथ चर्चा

JPC की चेयरपर्सन अपराजिता सारंगी ने कहा कि समिति इस बेहद संवेदनशील विधेयक पर पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ काम कर रही है। अब तक हुई प्रगति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इस संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के गठन के बाद पहली बैठक 4 दिसंबर 2025 को हुई थी। आज के सत्र को मिलाकर अब तक कुल 12 बैठकें हो चुकी हैं। इस दौरान लगभग 43 अलग-अलग संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जा चुका है। खास बात यह है कि दिल्ली और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों के साथ भी इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई है।

11 राज्य सरकार और 27 पार्टियों से मांगे गए सुझाव

अपराजिता सारंगी के अनुसार, अब तक लगभग 11 राज्य सरकारें इस प्रक्रिया में शामिल हुई हैं। इसके अलावा 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजे गए, जो समिति के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हो सके और उनसे लिखित सुझाव मांगे गए। समिति ने देश भर की 27 प्रमुख राजनीतिक पार्टियों से संपर्क किया। हालांकि, कुछ विपक्षी पार्टियों ने समिति के सामने पेश होने या प्रक्रिया में भाग लेने से इनकार कर दिया, लेकिन हर पार्टी को अपने विचार रखने के दो मौके दिए गए। जिसमें से 5 पार्टियों ने लिखित रूप में अपने सुझाव सौंपे।

क्या है यह बिल?

गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गए बिल में एक प्रावधान है जिसके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को पद छोड़ना होगा यदि उन्हें किसी गंभीर अपराध के लिए गिरफ़्तार किया जाता है और लगातार 30 दिनों तक पुलिस या न्यायिक हिरासत में रखा जाता है। इसका बिल का मुख्य मकसद कस्टडी से सरकार चलाने की प्रथा को रोकना है।