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Supreme Court Citizenship: चुनाव आयोग नहीं करेगा नागरिकता का फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया संवैधानिक प्रावधान

Election Commission: क्या वोटर लिस्ट से नाम कटते ही छिन जाएगी आपकी नागरिकता? सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने साफ कर दिए हैं देश के नियम-कायदे।
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नई दिल्ली

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Manoj Vashisth

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Updated: 17 Jul 2026, 2:37 PM IST

Supreme Court

Supreme Court of India: सुप्रीम कोर्ट का अहम संदेश, नागरिकता का निर्धारण चुनाव आयोग का नहीं है अधिकार (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Election Commission Cannot Rule on Citizenship: क्या वोटर आईडी कार्ड न होने या मतदाता सूची से नाम कट जाने का मतलब यह है कि आपकी भारतीय नागरिकता खत्म हो गई? इस बेहद संवेदनशील और बड़े सवाल पर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐसा मील का पत्थर फैसला सुनाया है, जो हर हिंदुस्तानी को राहत देने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता तय करना चुनाव आयोग (Election Commission) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।

अदालत ने साफ किया कि चुनाव आयोग का काम सिर्फ और सिर्फ मतदाता सूची का नियंत्रण, प्रबंधन और उसकी निगरानी करना है, न कि किसी को देश का नागरिक या गैर-नागरिक घोषित करना।

अधिकार क्षेत्र की लक्ष्मण रेखा तय

पश्चिम बंगाल के एक मामले (SIR विवाद) की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कानून की स्थिति को पूरी तरह साफ कर दिया। अदालत ने कहा कि कानून में इसे लेकर रत्ती भर भी भ्रम नहीं होना चाहिए।

अगर कोई ट्रिब्यूनल यह फैसला देता है कि किसी व्यक्ति का नाम संदिग्ध भारतीय नागरिक (SIR) की सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, तो चुनाव आयोग खुद उसकी नागरिकता पर फैसला नहीं ले सकता। ऐसी स्थिति में आयोग को यह मामला सीधे संबंधित मंत्रालय (गृह मंत्रालय) को भेजना होगा, क्योंकि नागरिकता तय करने का संवैधानिक अधिकार सिर्फ सरकार के पास है।

राशन और सरकारी योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

इस पूरे कानूनी दांवपेंच के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद मानवीय और जरूरी पहलू पर भी संज्ञान लिया है. अदालत के सामने एक याचिका दायर कर यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, उन्हें सरकारी तंत्र द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है. बड़ा आरोप: वोटर लिस्ट में नाम न होने का बहाना बनाकर गरीबों को पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS/राशन), अन्नपूर्णा योजना और अन्य कल्याणकारी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस जनहित से जुड़े मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए याचिका पर विस्तार से सुनवाई करने की रजामंदी दे दी है। अदालत ने साफ किया कि मतदाता सूची में नाम न होने मात्र से किसी व्यक्ति की नागरिकता स्वतः समाप्त नहीं हो जाती, इसलिए उन्हें बुनियादी हकों से दूर नहीं किया जा सकता। इस मामले की अगली निर्णायक सुनवाई 25 अगस्त को तय की गई है।