केंद्र सरकार अब 125 दिन की रोजगार गारंटी देने जा रही है। नए कानून में कुछ ऐसे प्रावधान है इससे राज्य की सरकारें नाराज हो सकती हैं। जानिए योजना से जुड़ी पूरी डिटेल...
केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म कर उसकी जगह ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण' (वीबी जी-राम-जी) लाने की तैयारी में है। नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 के बजाय 125 दिन रोजगार की गारंटी दी जाएगी।
साथ ही फसल बुआई और कटाई के समय दो महीने का विशेष ब्रेक भी रखा जाएगा। मजदूरी का भुगतान अब 15 दिन के बजाय सात दिन में होगा। संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन लोकसभा की ओर से जारी पूरक कार्यसूची में वीबी जी-राम-जी समेत चार विधेयकों को पेश किए जाने की जानकारी दी गई है।
| प्रावधान | मनरेगा (MGNREGA) | वीबीजी-रामजी (VB-G RAM G) |
|---|---|---|
| सालाना रोजगार के दिन | 100 दिन | 125 दिन |
| फंडिंग पैटर्न (केंद्र-राज्य) | मजदूरी: 100%-0% सामग्री: 75%-25% | कुल व्यय: 60%-40%* (मजदूरी और सामग्री दोनों के लिए; उत्तर-पूर्वी एवं पर्वतीय राज्यों में 90%-10%) |
| फसल के समय ब्रेक | नहीं | दो माह (लगभग 60 दिन) का ब्रेक |
| मजदूरी भुगतान | 15 दिन में | 7 दिन में (साप्ताहिक या अधिकतम 15 दिन) |
| 15 दिन में रोजगार न मिलने पर भत्ता | हां | हां |
सरकार ने मनरेगा को निरस्त कर नया कानून लाने का प्रस्ताव रखा है, जिसकी प्रतियां लोकसभा सांसदों को वितरित की जा चुकी हैं। सरकार का दावा है कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप ग्रामीण रोजगार नीति में यह बड़ा नीतिगत बदलाव किया जा रहा है। वर्ष 2005 में शुरू की गई यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा के स्थान पर अब बदले हुए सामाजिक-आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए नया ढांचा तैयार किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में मनरेगा के लिए 86,000 करोड़ रुपए आवंटित किया गया है।
सरकार के मुताबिक पिछले 20 वर्षों में मनरेगा ने ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया, लेकिन अब गांवों की जरूरतें और कार्य-स्वरूप बदल चुके हैं।
मनरेगा के मुकाबले विकसित भारत जी-राम-जी में राज्य सरकार का हिस्सा 40 फीसदी करने का मुद्दा गरमा सकता है। एनडीए में शामिल टीडीपी ने दबे स्वर में विरोेध जताते हुए इसे राज्य पर बोझ डालने वाला बताया है।
मजदूर किसान शक्ति संगठन (एमकेएसएस) के संस्थापक सदस्य निखिल डे ने कहा कि यह भारत में काम के कानूनी अधिकार का अंत है। इससे मनरेगा की मूल संरचना और उससे जुड़े अधिकारों को ध्वस्त किया जा रहा है। नया कानून देश को फिर से आवंटन-आधारित योजनाओं की ओर ले जा रहा है। यह राज्यों पर भारी और अव्यावहारिक वित्तीय बोझ डालता है।
भाजपा के वैचारिक सहयोगियों ने गांधीजी के शरीर की हत्या की थी और आज वे उनके विचार की हत्या करने के लिए उनका नाम मिटा रहे हैं। हम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम योजना का नाम बदलने का कड़ा विरोध करते हैं। - केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस महासचिव
पीएम नरेंद्र मोदी ने 10 साल पहले नरेगा योजना को लेकर कांग्रेस की खिल्ली उड़ाते हुए इसमें जरूरी बदलाव का वादा किया था। संसद में मोदी ने 28 फरवरी, 2015 को कहा था कि यह योजना यूपीए की विफलताओं के जीवंत स्मारक के रूप में जारी रहेगी क्योंकि लोगों को गड्डे खोदने में लगा दिया गया। उनकी सरकार इस योजना में जो भी आवश्यक होगा, वह जोड़ेगी, न कि कुछ घटाएगी।