
BJP-JD(S) alliance: कर्नाटक में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी पार्टी जनता दल (एस) सेक्युलर के नेता एच डी कुमारस्वामी कांग्रेस की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। वह इन दिनों कांग्रेस सरकार के सबसे बड़े विरोधी बनकर उभरे हैं। कर्नाटक की राजनीति में उनके बढ़ते फोकस को 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए पार्टी की रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है। इससे सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या साल 2028 के विधानसभा चुनाव में BJP को JDS का साथ मिलेगा? या दोनों पार्टियों की राहें अलग हो जाएंगी। इससे साल 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भी नए सियासी समीकरण बनाए जाने की संभावना है।
एचडी कुमारस्वामी मोदी कैबिनेट में केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्रालय का जिम्मा संभाले हुए हैं, लेकिन उनकी नजर राज्य की राजनीति पर अधिक है। वह डीके शिवकुमार सरकार के खिलाफ इन दिनों सबसे मुखर रूप से सामने आए हैं। हाल के स्टिंग वीडियो विवाद समेत कई मुद्दों पर कुमारस्वामी के अकेले आगे बढ़ने से BJP के कुछ नेता नाराज हैं। प्रदेश बीजेपी ईकाई के कुछ नेताओं का मानना है कि साल 2028 से पहले कुमारस्वामी अलग रुख भी इख्तियार कर सकते हैं।
कर्नाटक में नेतृत्व के मुद्दो को अभी तक दिल्ली सुलझा नहीं पाई है। इससे कुमारस्वामी की अगुवाई में जनता दल सेक्युलर को राज्य में पैर जमाने की जगह मिलते हुए दिखाई दे रही है। बीते कुछ महीनों में कुमारस्वामी ने बिदादी टाउनशिप प्रस्ताव, बेंगलुरु-मैसूरु इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC/NICE) विवाद, KPSC भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और हालिया वीडियो विवाद जैसे मुद्दों पर कांग्रेस सरकार पर तीखे हमले किए हैं। इन हमलों के चलते शिवकुमार और उनके मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्रियों को बार-बार जवाब देना पड़ा है।
BJP की तुलना में JD(S) ने इन मुद्दों पर लगातार अभियान चलाए हैं। स्टिंग वीडियो विवाद पर कुमारस्वामी ने पिछले हफ्ते कई प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने सीएम डीके शिवकुमार पर विरोधियों को घेरने के लिए स्टिंग वीडियो की "फैक्टरी" चलाने का आरोप लगाया। इस पर मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि समय जवाब देगा।
JD(S) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कुमारस्वामी का असली विपक्ष के नेता के रूप में उभरे हैं। पार्टी के नेता ने कहा कि डीके शिवकुमार के साथ उनकी पुरानी प्रतिद्वंद्विता रही है। दोनों ही वोकालिग्गा समुदाय से आते हैं। उन्होंने आगे बताया कि 2018-19 की कांग्रेस-JD(S) गठबंधन सरकार के दौरान थोड़े समय की सुलह को छोड़ दें, तो दोनों के बीच कभी नहीं बनी। इसके साथ ही, बीजेपी के कोई भी नेता भी हाल के दौर में कोई भी मुद्दा उठाने में सफल नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष आर अशोक या BJP प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र के मुकाबले कुमारस्वामी की बात का वजन ज़्यादा होता है। इस खालीपन का फायदा JD(S) को मिला है, क्योंकि कुमारस्वामी मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाते हैं। वहीं, बीजेपी के नेताओं ने भी अंदरखाने यह बात मानी कि मुद्दे उन्होंने भी उठाए लेकिन वे उतने सफल नहीं रहे जितने पूर्व मुख्यमंत्री रहे।
BJP-JD(S) गठबंधन के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि इस पर कुछ कहना अभी जल्दबाज़ी होगी। हाल ही में अटकलों को खारिज करते हुए BJP संसदीय बोर्ड के सदस्य और पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा (प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र के पिता) ने कहा कि दोनों पार्टियां साथ हैं और आगे भी साथ रहेंगी। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां मिलकर इस भ्रष्ट सरकार को हटाने और 2028 में सत्ता हासिल करने के लिए लड़ेंगी।