
Delhi AQI Today : दिल्ली में सांस लेना हुआ मुश्किल! AQI 226 पहुंचा, लागू हुआ GRAP-1 (फोटो सोर्स: ANI)
Delhi Air Quality Index: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का साया एक बार फिर गहरा हो गया है। गुरुवार सुबह सात बजे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक एयर क्वालिटी इंडेक्स 226 रहा, जो खराब श्रेणी में आता है। इससे पहले बुधवार को भी शहर ने इस मौसम का पहला खराब दिन देखा था। दशहरे की रात पटाखों और आग के धुएं ने हालात और बिगाड़ दिए। कई इलाकों में घनी धुंध छाई रही। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने स्थिति को देखते हुए तुरंत ग्रैप का स्टेज-1 लागू कर दिया है ताकि प्रदूषण और न बढ़े।
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर फिर चिंता का विषय बन गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार गुरुवार सुबह सात बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 226 दर्ज किया गया। यह ‘खराब’ श्रेणी में आता है। एक दिन पहले बुधवार को शहर ने इस सीजन का पहला ‘खराब’ दिन देखा था जब रात भर दशहरे के जश्न के बाद कई इलाकों में घनी धुंध छा गई थी।
बुधवार सुबह दस बजे AQI 238 तक पहुंच गया था, जो मंगलवार दोपहर के 179 से 59 अंक की उछाल थी। जहांगीरपुरी में 309 और चांदनी चौक में 307 का स्तर दर्ज हुआ, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है। आलीपुर 273, बावाना 275, पटपड़गंज 298, रोहिणी 291, वजीरपुर 253, अक्षरधाम 237, आनंद विहार 237, अशोक विहार 223 और आईटीओ 280 जैसे कई क्षेत्रों में ‘खराब’ स्थिति बनी रही।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने बुधवार को ग्रैडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का स्टेज-1 पूरे दिल्ली-एनसीआर में लागू कर दिया। आयोग की उप-समिति ने क्षेत्र की वायु गुणवत्ता की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया। आदेश में कहा गया कि 20 अक्टूबर को AQI 179 (मध्यम) था, जो 21 अक्टूबर दोपहर दो बजे 244 (खराब) तक पहुंच गया। भारतीय मौसम विभाग और आईआईटीएम के पूर्वानुमान में आने वाले दिनों में भी ‘खराब’ श्रेणी बनी रहने की संभावना जताई गई है।
ग्रैप स्टेज-1 के तहत सभी संबंधित एजेंसियों को सख्त निगरानी रखने और उपाय तेज करने को कहा गया है। नागरिकों से भी अनुरोध किया गया है कि वे स्टेज-1 के नागरिक चार्टर का पालन करें। सीपीसीबी के अनुसार AQI 0-50 अच्छा, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब और 401-500 गंभीर माना जाता है।
दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर हर साल प्रदूषण का पीक सीजन माना जाता है। पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने, वाहनों का धुआं, निर्माण धूल और मौसमी हवा की गति कम होने से हालात बिगड़ते हैं। पिछले वर्षों में दिवाली के आसपास AQI अक्सर बहुत खराब या गंभीर स्तर तक पहुंच जाता था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक खराब हवा में रहने से सांस की बीमारियां, अस्थमा और हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ता है।
सरकार और एजेंसियां ग्रैप के जरिए निर्माण गतिविधियों पर अंकुश, सड़कों की सफाई और वाहनों की जांच जैसे कदम उठाती हैं। नागरिक भी निजी वाहनों का कम इस्तेमाल, मास्क पहनकर अपना योगदान दे सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थायी समाधान के लिए पराली प्रबंधन, हरित आवरण बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा पर जोर देना जरूरी है। फिलहाल दिल्लीवासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि मौसम में बदलाव से राहत मिलेगी, वरना सर्दी शुरू होते ही हालात और कठिन हो सकते हैं।
Updated on:
22 Oct 2026, 9:54 AM IST
Published on:
22 Oct 2026, 8:46 AM IST
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