सरकार की ओर से कहा गया है कि आरसीबी के विजय अभिनंदन समारोह के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ मामले की जांच अति आवश्यक है। इसलिए निर्देश दिया जाता है कि एक महीने के भीतर जांच पूरी कर सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाए। सूत्रों का कहना है कि आयोग को सिर्फ चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई घटनाओं पर ही ध्यान केंद्रित करना है, न कि पूरे समारोह पर।
Bengaluru Stampede: चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ की घटना की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय माइकल डी कुन्हा आयोग को एक महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़ मामले को प्राथमिकता दी जाए। कोविड-19 महामारी की रोकथाम एवं नियंत्रण के संबंध में दवाओं, उपकरणों, ऑक्सीजन प्रबंधन और ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौतों की जांच की जिम्मेदारी भी कुन्हा आयोग को दी गई है। सरकार ने इस मामले की जांच के संदर्भ में आयोग का कार्यकाल बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2025 कर दिया है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि आरसीबी के विजय अभिनंदन समारोह के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ मामले की जांच अति आवश्यक है। इसलिए निर्देश दिया जाता है कि एक महीने के भीतर जांच पूरी कर सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाए। सूत्रों का कहना है कि आयोग को सिर्फ चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई घटनाओं पर ही ध्यान केंद्रित करना है, न कि पूरे समारोह पर।
आयोग से यह जांच करने को कहा गया है कि चिन्नास्वामी स्टेडियम में कार्यक्रम आयोजित करते समय क्या आवश्यक अनुमतियां और मंजूरी ली गई थीं? क्या मानदंडों का पालन किया गया था? घटनाओं के अनुक्रम के आधार पर यह पता लगाया जाए कि स्टेडियम में हुई भगदड़ के लिए कौन-कौन लोग जिम्मेदार थे, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई।
स्टेडियम में ऐसी दुर्घटना को रोकने के लिए क्या एहतियाती उपाय किए गए थे। यदि कोई चूक हुई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है? आयोग को भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की सिफारिश करने को भी कहा गया है। पूर्व न्यायाधीश माइकल डी कुन्हा को जरूरत पडऩे पर तकनीकी और कानूनी मदद के लिए सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) अधिकारी और सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) के अधिकारी को शामिल करने के लिए अधिकृत किया गया है।