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लाडकी बहिन योजना की अगली किस्त पर विवाद, कांग्रेस ने चुनाव आयोग को खत लिखकर की ये मांग

महाराष्ट्र सरकार द्वारा मकर संक्रांति पर लाडली बहन योजना की दो किस्तें एक साथ जारी करने को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए आपत्ति जताई है।

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Jan 12, 2026
लाडकी बहिन योजना (AI Image)

Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र सरकार मकर संक्रांति के पावन पर्व पर लाडली बहन योजना के तहत महिलाओं को बड़ी सौगात देने जा रही है। सरकार दिसंबर और जनवरी की किस्त एक साथ जारी करने की तैयारी में है, जिससे लाभार्थी महिलाओं के खातों में कुल 3000 रुपये जमा होंगे। हालांकि, इस फैसले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है।

कांग्रेस ने जताई आपत्ति

कांग्रेस पार्टी ने इस किस्त पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। कांग्रेस का कहना है कि 15 जनवरी को महाराष्ट्र में BMC चुनाव के लिए मतदान होना है, और उससे ठीक पहले महिलाओं के खातों में पैसा ट्रांसफर करना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। कांग्रेस ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि लाडली बहन योजना के तहत करीब 1 करोड़ महिलाओं को लाभ मिलना है और चुनाव से पहले यह राशि देना सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचा सकता है। पार्टी का कहना है कि इससे महिलाएं प्रभावित होकर सत्ता पक्ष के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान कर सकती हैं, जो कि सरकारी घूस के समान है।

कांग्रेस ने क्या मांग की?

कांग्रेस ने साफ किया है कि वह लाडली बहन योजना के खिलाफ नहीं है, लेकिन उसकी मांग है कि इस योजना की किस्त मतदान के बाद लाभार्थी महिलाओं के खातों में डाली जाए। कांग्रेस की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि सरकार अपना पक्ष आज सुबह 11 बजे तक स्पष्ट करे।

बीजेपी का पलटवार

कांग्रेस के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा पलटवार किया है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस का यह रवैया महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। पार्टी ने दावा किया कि लाडली बहन योजना महिलाओं के कल्याण के लिए है और इसे राजनीति से जोड़ना गलत है।

महाराष्ट्र में महत्वपूर्ण है बीएमसी चुनाव

महाराष्ट्र में बीएमसी चुनावों को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर मुंबई में। बीएमसी पर सत्ता हासिल करने वाली पार्टी को न सिर्फ प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक रूप से भी बड़ी ताकत मिलती है। यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल इन चुनावों पर पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

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