Landslide in Wayanad: वायनाड के चूरलमाला में देर रात हुए भूस्खलन में मरने वालों की संख्या 106 हो गई है। बताया जा रहा है कि भूस्खलन के बाद नदियों का रास्ता बदल लिया था। इसके कारण ही तबाही का मंजर बहुत भयावह हो गया है। केरल सरकारने दो दिवस शोक की घोषणा करते हुए सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं और राष्ट्रीय ध्वज झुका दिया है।
Landslide in Wayanad: वायनाड के चूरलमाला में देर रात हुए भूस्खलन में मरने वालों की संख्या 106 हो गई है। केरल सरकारने दो दिवस शोक की घोषणा करते हुए सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं और राष्ट्रीय ध्वज झुका दिया है। देर रात दो बजे हुए इस भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा का संपर्क अभी भी टूटा हुआ है।
बचाव के लिए भारतीय वायु सेना, भारतीय सेना, एनडीआरएफ सहित कई एजेंसियां लगी हुई हैं। केरल के मुख्य सचिव वी. वेणु ने बताया कि सोमवार देर रात रात दो बजे के आसपास करीब तीन बार भूस्खलन हुआ। इस समय मौसम भी खराब है। इसके कारण राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है। बताया जा रहा है कि भूस्खलन के बाद नदियों का रास्ता बदल गया। इसके कारण ही तबाही का मंजर बहुत भयावह हो गया है।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन लगातार राहत कार्य पर नजर बनाए हुए हैं। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) भी राहत बचाव कार्य में लगा हुआ है। अभी भी मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांव में 400 परिवार फंसे बताए जा रहे हैं। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया है कि चिकित्सा विभाग युद्ध स्तर पर इस बचाव कार्य में शामिल है। इलाज और बचाव का कार्य तेजी से जारी है। इसके अलावा सिविल डिफेंस, पुलिस, दमकल विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के करीब 250 जवान बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।
यहां राहत एवं बचाव कार्य में भारतीय सेना, भारतीय नौ सेना, भारतीय वायु सेना के साथ तमाम एजेंसियां उतर चुकी हैं। भारतीय सेना ने 225 जवानों की चार टुकड़ी उतार दी है। वहीं तलाशी में ड्रोन और डॉग स्कवायड की भी मदद ली जा रही है। इसके साथ ही वायु सेना ने एक MI-17 और ALH ध्रुव हेलिकॉप्टर भारतीय सेना और नौसेना के गोताखोरों को बचाव कार्य में उतारा है। एनडीआरीएफ और एसडीआरएफ भी लगी हुई हैं। केरल के वायनाड में इस तरह की तबाही पहली बार देखी गई है। जहां मानव बस्ती थी वहां तबाही का मंजर नजर आ रहा है।
मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांव में हुए भूस्खलन में सबसे बाद में बचाव कार्य शुरू किया जा सका। मुंडक्कई में करीब 15 घंटे बाद बचाव दल पहुंच पाया। बताया जा रहा है कि सबसे ज्यादा तबाही मुंडक्कई में ही हुई है। यहां पहुंचने वाला रोड और ब्रिज पूरी तरह से ही तबाह हो गया था। अब यहां से 150 लोगों को निकाला जा चुका है। स्वान दल मलबे दबे लोगों की तलाश कर रहा है।
आसमान से टूटे इस कहर से निपटने में भारतीय सेना ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भारतीय सेना के टेरिटोरियल आर्मी की 122 इन्फेंट्री बटालियन मद्रास के सेकेंड-इन-कमांड के नेतृत्व में 43 कर्मियों की एक टीम काम कर रही है। इसमें एक चिकित्सा अधिकारी और दो जेसीओ हैं। वहीं कन्नूर के रक्षा सुरक्षा कोर यानी DSC केंद्र से 200 सैनिकों का दो बचाव दल मौके पर पहुंच गया है। सैन्य अस्पताल की चिकित्सा टीम सहित प्रादेशिक सेना की टुकड़ियां भी तैनात हैं।