
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है, लेकिन इसके बावजूद उसकी गतिविधियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। जेल से ही उसने अपने गैंग को इंटरनेशनल सिंडिकेट में बदल दिया है। इस सिंडीकेट का नेटवर्क विदेशों में भी फैला हुआ है। भारत (India) में बैठकर लॉरेंस का इंटरनेशनल सिंडिकेट अमेरिका (United States of America), कनाडा (Canada), ब्रिटेन (Britain), यूरोप (Europe) और ऑस्ट्रेलिया (Australia) तक में रंगदारी, हत्या, मादक पदार्थ और हथियारों की तस्करी करवा रहा है। समय-समय पर विदेशों में लॉरेंस गैंग के गैंगस्टर्स आपराधिक गतिविधियों को अंजाम भी देते हैं। वहीँ युवाओं को लुभाने के लिए लॉरेंस ने अपनी सार्वजनिक छवि देशभक्त, राष्ट्रवादी और धार्मिक व्यक्ति के रूप में गढ़ रखी है।
लॉरेंस गैंग शिकार की पहचान सरकारी डेटाबेस, सोशल मीडिया और निगरानी के माध्यम से करता है। इसके बाद एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप से संपर्क कर रंगदारी मांगी जाती है। किसी ने इनकार किया तो उसे और भारत में रह रहे उसके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी जाती है।
जानकारी के अनुसार लॉरेंस गैंग का ढांचा पूरी तरह से विकेंद्रीकृत है। टॉप गैंगस्टर्स को छोड़कर ज़्यादातर सदस्यों को एक-दूसरे की पहचान और भूमिका की जानकारी बहुत कम है। ऐसे में गिरफ्तारी की स्थिति में भी पूरे नेटवर्क तक एजेंसियों की पहुंच मुश्किल हो जाती है।
विदेशों में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए लॉरेंस गैंग सोशल मीडिया से पंजाब सहित पूरे भारत के गरीब नाबालिग लड़कों की भर्ती करता है। इसके बाद आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पैसे, पहचान और सुरक्षा का लालच, छात्र या वर्किंग वीज़ा दिलाकर विदेश में भेजा जाता है।
लॉरेंस गैंग विदेशों में अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए खास तौर पर नाबालिग लड़कों को चुनता है। पढ़कर मन में सवाल आना स्वाभाविक है कि इसके पीछे क्या वजह है? नाबालिग लड़कों को इसलिए चुना जाता है जिससे अपराध के बाद अगर वो विदेशों में पकड़े भी जाए, तो उन्हें कम सज़ा हो नाबालिगों के खिलाफ सख्त सज़ा के कानून नहीं हैं। इससे वो बड़ी सज़ा से बच जाते हैं।
कनाडा में 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भी लॉरेंस गैंग का हाथ बताया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार लॉरेंस और गोल्डी बराड़ (Goldy Brar) ने ही निज्जर की हत्या करवाई थी। अमेरिकी अधिकारियों के साथ ही कनाडा पुलिस ने भी माना कि इसमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।