lok sabha elections 2024: त्रिपुरा की राजनीति ने यूटर्न ले लिया है। 10 सालों में खेती भी यहां बदल गई है। इस खेती के साथ राजनीति यहां पूरी तरह से बदल गई है।
Lok sabha elections 2024:त्रिपुरा की राजधानी अगरतला की चिपचिपी गर्मी से निकल कुमारघाट रेलवे स्टेशन से होते हुए जब कंचनपुर-दसदा घाटी के जंपुई हिल स्टेशन पहुंचते हैं तो ठंडक के साथ-साथ शांति का अहसास आपको होने लगता है। चाय के बागान के साथ हरे-भरे मैदान मंत्रमुग्ध कर देते हैं। यहां की राजनीति में भी यही शांति साफ दिखाई देती है।
हालांकि एक चीज खटकती है वह यह कि जंपुई हिल के विश्व प्रसिद्ध संतरे अब यहां के खेतों से गायब हैं। अब संतरे की मिठास कम हो गई है। हर वर्ष नवंबर में संतरे का सालाना जलसा होता है लेकिन अब वो संतरे नहीं होते हैं। अब यहां सुपारी की खेती होने लगी है। राजनीति पर भी नजर डाले तो यही स्थिति दिखाई देती है। यहां से अब सीपीआइ भी संतरे की तरह ही गायब दिखाई दे रही है।
कंचनपुर में रहने वाली अपला देवनाथ कहती हैं कि जब लाभ नहीं मिलेगा तो खेती बदली जाएगी। संतरे की जगह अब कीनू ने ले लिया है और कीनू की पैदावार हरियाणा सहित अन्य प्रदेशों में बेहतर हो रही है। ऐसे में यहां के संतरे को उचित कीमत नहीं मिल रही थी तो खेती बदल गई है। अब पार्टी हो या खेती, जब आम आदमी के लिए घाटे का सौदा होगी तो वह निश्चित ही बदल जाएगी।
2019 से बदलाव
लोकसभा चुनाव 2019 में राजनीति की खेती यहां बदल गई, जब पहली बार भाजपा प्रत्याशी रेबती देबबर्मा जीतीं। इस बार भाजपा टिपरा मोथा के साथ चुनाव लड़ रही है। टिपरा मोथा के अध्यक्ष प्रद्युत विक्रम मणिक्य देबबर्मा की बहन कीर्ति सिंह देबबर्मा को टिकट दिया गया। सीपीआइ ने कांग्रेस गठबंधन में राजेंद्र रियांग को चुनाव में उतारा है। यहां सीपीआइ का कोई विधायक नहीं है।