आज के समय में शादी समारोह में प्री-वेडिंग शूट और DG बजाने का चलन तेजी से बढ़ा है। इस आधुनिक माहौल में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो फिजुलखर्ची और वेस्टर्न कल्चर (Western Culture) के खिलाफ हैं। ऐसे ही एक समाज ने शादी में फिजूलखर्ची, प्री-वेडिंग शूट और DJ पर पाबंदी लगा दी है।
वर्तमान समय में शादी समारोह में प्री-वेडिंग शूट, DG बजाना, नाच-गाना और तमाम प्रकार से मनोरंजन वाले कार्यक्रमों का आयोजन आम बात है। ऐसे समय में कुछ लोग इस प्रकार के आयोजनों को फिजूलखर्ची बताते हैं। मध्य प्रदेश में ऐसे ही एक समाज ने शादी में फिजूलखर्ची, प्री-वेडिंग शूट और DJ पर पाबंदी लगा दी है। खास बात है कि नियम तोड़ने पर जुर्माना लगाया जाएगा।
मध्यप्रदेश के हरदा जिले में क्षत्रिय मारवाड़ी माली समाज ने बदलती जीवनशैली और पाश्चात्य संस्कृति (वेस्टर्न कल्चर) के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सराहनीय कदम उठाए हैं। क्षत्रिय मारवाड़ी समाज की हालिया बैठक में फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने और महिलाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं। समाज द्वारा जारी की गई गाइडलाइन 1 मई 2026 से पूरे संभाग में लागू होंगी।
क्षत्रिय मारवाड़ी माली समाज ने सर्वसम्मति से नए नियम लागू किए हैं। समाज का मानना है कि महंगाई और दिखावे की होड़ ने परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। इसके साथ ही वेस्टर्न कल्चर के प्रभाव से भारतीय सांस्कृतिक मूल्य क्षीण हो रहे हैं। इन गाइडलाइंस का उद्देश्य शादियों को सादगीपूर्ण और मर्यादित बनाना है। इस बैठक में मारवाड़ी माली समाज के संभाग अध्यक्ष ओपी सोलंकी, सचिव नन्हेलाल भाटी, शिवनारायण भाटी, देवीसिंह सांखला, राजकुमार सांखला, नरेंद्र भाटी, पीएन भाटी, विनोद भाटी सहित कई प्रमुख सदस्य मौजूद रहे।
मारवाड़ी माली समाज की बैठक में तय हुआ कि शादी-ब्याह के दौरान कानफोड़ू DJ पर गाने बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियम तोड़ने पर 11,000 रुपए का जुर्माना लगेगा। बनौली और बारात में महिलाओं का सड़कों पर नाचना भी वर्जित रहेगा। प्री-वेडिंग शूट पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। कपड़ों की जगह लिफाफे में नकद राशि भेंट करने की अनुमति दी गई है, जिससे अनावश्यक खर्च बचेगा। निमंत्रण के लिए मोबाइल और डिजिटल माध्यम को प्राथमिकता दी जाएगी।
मृत्युभोज पर भी कुछ शर्तों के साथ पाबंदी लगाई गई है। इससे पहले नर्मदापुरम संभाग में गुर्जर समाज और बुंदेलखंडीय कुर्मी समाज ने भी फिजूलखर्ची रोकने तथा अन्य समाज सुधार के कदम उठाए थे। समाज के लोगों का कहना है कि ये नियम न केवल आर्थिक बोझ कम करेंगे, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित रखेंगे। स्थानीय स्तर पर इनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी समितियां बनाई जाएंगी।